झांसी। शनिवार से भगवान गणेश की आराधना घर-घर प्रारंभ हो गई है। श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर भगवान गणेश की विधिवत प्रतिमा विराजमान की। कलश स्थापित कर अखंड दीप प्रज्वलित किए। बाल भक्तों ने घरों में आकर्षक झांकियां भी सजाईं। गणेश उत्सव का पर्व जलझूलनी एकादशी तथा अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाएगा। वहीं, महाराष्ट्र समाज के गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं ने अथर्वशीर्ष का पाठ किया और भगवान गणेश की आराधना की।
सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। प्रत्येक शुभ कार्य में उनकी पूजा का विधान है। शनिवार गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को घरों में विराजमान करने के लिए श्रद्धालु में विशेष उत्साह नजर आया। श्रद्धालु अपने परिवार के साथ प्रतिमाओं को विभिन्न वाहनों से ले आते नजर आए। महानगर के बाजारों गंदीगर का टपरा, बड़ा बाजार, सदर और सीपरी में लगी मूर्तियों की दुकानों तथा दूध, दही तथा प्रसाद की दुकानों पर खासी चहल-पहल नजर आई। मंदिरों तथा घरों में गौरी पुत्र गणेश की प्रतिमा को स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान का मोहक श्रृंगार किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। इधर महाराष्ट्र समाज के गणेश मंदिर में महाराष्ट्र समाज के श्रद्धालुओं ने
रिद्धि-सिद्धि के संग विराजे भगवान गणेश की पूजा की।
इधर बड़ा बाजार स्थित गणेश मड़िया मंदिर में कमल के फू ल पर विराजमान भगवान गणेश की श्रद्धालुओं ने मोहक श्रृंगार कर पूजन किया। इधर युवा ब्राह्मण महासंघ कार्यालय में वैदिक मंत्रों के बीच कलश पूजन किया और भगवान गणेश की विधिवत प्रतिमा विराजमान की। श्रद्धालुओं में रवीश त्रिपाठी, जगदीश मिश्रा, महेश पांडे ने भगवान को मोदक का प्रसाद लगाया और कोरोनावायरस से मुक्ति की गुहार लगाई।
महंगी मिली मूर्तियां
बाजार में आज श्रद्धालुओं को मूर्तियां काफी महंगी मिलीं। पिछले साल आधा फि ट की मिट्टी की मूर्ति जो 20 से 30 रूपये में प्राप्त होती थी। वह इस बार 101 रुपये में मिली। इस बार बाजार में दो फि ट से ऊपर की प्रतिमा नहीं मिली। बाजारों में आज भगवान गणेश की प्रतिमा कई आकर्षक स्वरूपों में थी।
सोशल मीडिया पर छाया गणेश चतुर्थी का पर्व
भले ही कोरोना वायरस के कारण इस बार सार्वजनिक गणेश उत्सव पंडाल नहीं सज पाए हो। लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं रही। सोशल मीडिया साइट्स पर गणेश चतुर्थी पर्व की शुभकामनाओं के संदेशों का आदान-प्रदान खूब हुआ। लोगों ने भगवान गणेश के भक्ति गीत भी एक दूसरे को भेजे।