झांसी। कोरोना काल में मजदूरों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विडंबना देखिए जिस रोटी के लिए श्रमिकों का गांव छूटा अब गांव आकर भी उन्हें नसीब नहीं हो रही। लॉकडाउन लगने के कारण उनका रोजगार चला गया। महानगरों में रुकने का आधार ही खत्म हो गया। पैदल, ट्रकों, लोडरों, ट्रेन में भी वे भूखे ही आए। अब जब कि अपने घर पहुंच गए हैं सरकारी अमले की अनदेखी के कारण उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। लिहाजा घर आकर भी उन्हें खाने के लाले हैं। आलम यह है कि मंडल भर में वापस लौटे 65 हजार प्रवासी श्रमिकों में से राशन कार्ड के लिए महज 3846 मजदूर पात्र मिले हैं। वहीं नौ हजार नए नाम जोड़े गए हैं। हालांकि विभाग का कहना है कि 53 हजार प्रवासी पहले से योजना से जुड़े हैं।
शासन ने लॉकडाउन के दौरान बाहरी प्रदेशों से आए श्रमिकों को राशन का लाभ देने के निर्देश दिए थे। पहले तो प्रवासी श्रमिकों को राशन किट और भोजन पैकेट बांटे जाते रहे। फिर शासन ने एप के जरिए सर्वे का काम शुरू कराया। पूर्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार मंडल में 65332 प्रवासी लोग आए, जिनमें से 3846 लोग ही राशन कार्ड के लिए पात्र पाए गए। साथ ही 9264 लोगों के नए नाम कार्डों में जोड़े गए। हालांकि विभाग का कहना है कि तमाम प्रवासी श्रमिकों के नाम पहले से कार्ड में दर्ज हैं। लेकिन अब भी तमाम प्रवासी मजदूर राशन के लिए भटक रहे हैं। सरकारी राशन इनके लिए दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।
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झांसी में एक हजार कार्ड बने
झांसी जिले में बाहर से आए श्रमिकों में से महज 1067 के राशन कार्ड बन सके हैं। जबकि तमाम आवेदन सत्यापन के अभाव में लंबित पड़े हैं। वहीं तीन हजार नए नाम जोड़े गए हैं। जबकि जिले में 34500 श्रमिकों के आने की रिपोर्ट प्रशासन दे रहा है। ऐसे में सिस्टम की लेटलतीफी प्रवासी श्रमिकों पर भारी पड़ रही है।
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ललितपुर में बने महज 668 कार्ड
ललितपुर में भी प्रवासी श्रमिकों के राशन कार्ड बनाने का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां प्रशासन 17 हजार प्रवासी श्रमिकों की रिपोर्ट दे रहा है, लेकिन महज 668 प्रवासी श्रमिकों के राशन कार्ड बन सके हैं। जबकि 1702 लोगों के नाम जोड़े गए हैं। वहीं जालौन में 1492 नए कार्ड बने हैं और 4294 नए नाम जोड़े गए हैं।
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वर्जन
मंडल में 65 हजार में से 53 हजार के नाम पहले से जुड़े हुए थे। सर्वे के बाद 11 हजार में से 3846 प्रवासी श्रमिक पात्र पाए गए हैं। जिनके कार्ड बनाए जा रहे हैं। नौ हजार नए नाम जोड़े गए हैं। अगर किसी श्रमिक का कार्ड नहीं बना है, तो वह आवेदन कर सकता है। तत्काल कार्ड बनाया जाएगा।
राधेरमण शुक्ल, उपायुक्त खाद्य
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668 प्रवासियों ने अभी तक राशन कार्ड बनवाएं हैं। अन्य व्यक्तियों के आवेदन प्राप्त होते हैं तो उनके भी राशन कार्ड बनवाएं जाएंगे।
- चंद्रशेखर सहाय, पूर्ति निरीक्षक, ललितपुर