आयकर अधिवक्ता संघ ने कार्यशाला आयोजित कर जीएसटी को लेकर भ्रांतियां दूर कीं। मुख्य वक्ता राहुल यादव ने कहा कि प्रत्येक व्यापारी को टैक्स इनवाइस से की गई बिक्री का विवरण प्रत्येक माह की 10 तारीख, खरीद व ब्रिकी का मिलान 15 तारीख एवं कर का भुगतान 20 तारीख तक किया जाना आवश्यक है। जीएसटी में व्यापारी को बैंक से ऋण लेना आसान हो जाएगा, क्योंकि व्यापारी का विवरण जीएसटी के माध्यम से बैंक सत्यापित करेगा।
उन्होंने कहा कि प्रांत के अंदर और प्रांत के बाहर भुगतान किए टैक्स का लाभ व्यापारी उसी मद में प्राप्त कर सकेगा, जिसमें उसने टैक्स का भुगतान किया है। म्युचुअल फंड में दस लाख रुपये तक कमीशन आने पर किसी तरह का जीएसटी नहीं देना पड़ेगा। इसी प्रकार कंपोजीशन (समाधान) योजना का लाभ लेने वाला व्यापारी प्रांत के बाहर से माल आयात कर सकता है, किंतु प्रांत के बाहर बिक्री नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वैट में कार्य करने पर व्यापारी को प्रत्येक प्रांत में अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य था, लेकिन जीएसटी में व्यापारी केवल जीएसटी नंबर पर व्यापार किया जा सकता है।
जीएसटी को जल्दबाजी में लागू करने के कारण व्यापारियों को समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। यदि व्यापारी इसे समझ ले तो जीएसटी सरल टैक्स प्रणाली है। इस मौके पर आयकर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विजय खन्ना, अनिल गुरनानी, विवेक अग्रवाल, सुषमा अग्रवाल, जीएस सलूजा, दुर्गा प्रसाद, क्षितिज गुप्ता, नितेश गुप्ता, एचसी अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, राकेश झा, राजेश चंद्र गुप्ता उपस्थित रहे।