झांसी। रेल प्रशासन पुखरायां रेल हादसे के बाद से कानपुर रूट के संचालन पर विशेष नजर रख रहा है। इस रूट की कमजोर पटरियों को बदलने का काम तेजी से चल रहा है। इस लाइन का साठ किलोमीटर ट्रैक बदला जाना है, जिसमें अब तक 35 किलोमीटर बदला जा चुका है। ग्वालियर रोड क्रासिंग के आसपास ट्रैक बदलने के लिए नई पटरियां मंगवा ली गई हैं।
20 नवंबर 2016 को तड़के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस रेल हादसे के बाद से रेल प्रशासन झांसी-कानपुर ट्रैक पर बेहद सतर्कता से ट्रेनें चला रहा है। हादसे के बाद वर्तमान झांसी-कानपुर ट्रैक की पटरियों पर सवाल उठे थे। मशीनों से की जांच में भी कई सेक्शनों में पटरियां स्पीड से ट्रेनें दौड़ाने में सुरक्षित नहीं पाई गई थी। यहीं कारण है कि इस बजट में झांसी-कानपुर के बीच अलग-अलग सेक्शनों में 60 किलोमीटर पटरी बदलने के लिए बजट का प्रावधान किया गया। इसमें अकेले चौरा, पुखरायां, मलासा, लालपुर और पामा के बीच 36 किलोमीटर पटरी बदली जा रहीं है। साथ ही झांसी से मुस्तरा, गढ़मऊ, पारीछा के साथ ही छह और स्टेशनों के बीच कई जगह पटरियां बदलने का काम चल रहा है। जहां भी पटरी बदलने का काम चल रहा है, उन सेक्शनों में 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनें चलाई जा रही हैं। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पटरियों को एक निश्चित लोड निकलने के बाद ही बदला जाता है, जिसकी निगरानी लगातार की जाती है।
यह भी जानिए
भारतीय रेलवे में दो तरह की पटरियों का उपयोग होता हैं। इनमें एक का वजन 60 किलो( प्रति मीटर) और दूसरी 52 किलो (प्रति मीटर) की पटरी होती है। मेन लाइन में 60 किलो और ब्रांच लाइन में 50 किलो वजन वाली पटरी का उपयोग होता है। एक पटरी 120 मीटर लंबी होती है। मेन लाइन की पटरी के ऊपर से 880 ग्रोस मिलियन टन और ब्रांच लाइन की पटरी से 550 ग्रोस मिलयन टन भार (गाड़ियों का वजन) गुजरने के बाद बदला जाता है।
रेल प्रबंधन प्रणाली लागू
चौबीसों घंटे जिन पटरियों पर ट्रेनें दौड़ती हैं, रेलवे ने उनकी मरम्मत, रखरखाव आदि की जिम्मेदारी रेल पथ निरीक्षकों को सौंप रखी है। रेलवे ने एक निश्चित ट्रैफिक गुजरने के बाद उस पटरी को बदलने का प्रावधान किया है। अभी रेल पथ निरीक्षकों को अपने सेक्शन की पटरियों से जुड़ी जानकारियों को रिका़र्ड में रखना पड़ता है, मगर अब उनका काम पेपरलेस कर दिया गया है। एक-एक इंच पटरी की ऑनलाइन जानकारी केलिए रेल प्रबंधन प्रणाली लागू कर दी गई है।
इस योजना पर नहीं हो सका काम
रेल पटरियों पर बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए दो मालगाड़ियों को एक साथ जोड़कर चलाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन संचालन में आ रहे व्यवधान के कारण ऐसा नहीं हो सका। दो मालगाड़ियों को एक साथ खड़ी करने के लिए पंद्रह सौ मीटर लाइन की आवश्यकता पड़ रही थी। इसके लिए सिकरौंदा-आंतरी (झांसी व आगरा के मध्य), बुढ़पुरा-माताटीला (झांसी व बीना के मध्य) के अलावा बांदा-कानपुर सेक्शन तथा मानिकपुर-नैनी स्टेशन पर यह लाइन बनाई है, लेकिन यहां दो मालगाड़ियां एक साथ नहीं खड़ी हो पा रही हैं।
अब नहीं निकल पाएंगे गेट से नीचे से
रेलवे ने ग्वालियर रोड क्रासिंग पर 29 और 30 जुलाई की रात ब्लाक लेकर सड़क बनाने का काम किया। सड़क बनने से बूम गेट नीचे हो गए हैं। इससे दो पहिया वाहन चालक अब गेट बंद होने पर नीचे से नहीं गुजर पा रहे हैं। गौरतलब है कि, बंद गेट के नीचे से गुजरने पर एक हजार रुपये जुर्माना और छह माह तक की सजा हो सकती है।