झांसी। लक्ष्मी ताल की गुम हुई आठ एकड़ जमीन की तलाश अभी पूरी नहीं हो पाई है। बंदोबस्ती मानचित्र में भी जमीन कम पाई गई है। ऐसे में एक बार फिर राजस्व विभाग द्वारा मौके पर पैमाइश की तैयारी की जा रही है।
सरकार की हरी झंडी के बाद भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्राचीन लक्ष्मी ताल के सौंदर्यीकरण की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। भू अभिलेखों में दर्ज ताल का रकबा मौके पर न मिलने की वजह से यह स्थिति बनी हुई है। राजस्व विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी ताल की 80 एकड़ में से 72 एकड़ जमीन ही मौके पर मिली है। पुराने बंदोबस्ती नक्शे में भी 72 एकड़ जमीन ही पाई गई है। जबकि, भू अभिलेखों में जहां अस्सी एकड़ का रकबा दर्ज है। अवशेष आठ एकड़ जमीन की खोज के लिए राजस्व विभाग द्वारा ताल की पैमाइश की जा चुकी है। बावजूद, गुम हुई जमीन का पता नहीं चल पाया है।
उप जिलाधिकारी (सदर) भगवान शरण ने बताया कि बंदोबस्ती मानचित्र व मौके पर 72 एकड़ जमीन है। जबकि, अभिलेखों में 80 एकड़ भूमि दर्ज है। विभाग अभिलेखों के आधार पर भूमि की जांच में जुटा हुआ है। जल्द ही यहां दुबारा नाप होगी।