झांसी। बजट में बिजली वितरण की निजीकरण की घोषणा से अधिकारी व कर्मचारियों में गुस्सा भड़क गया है। इसके विरोध में तीन फरवरी को कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में क्षेत्रीय संयोजक इंजी चंद्रेश तोमर ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों की नीति समाप्त करने के नाम पर एक क्षेत्र में एक से अधिक कंपनियों के आने से साफ है कि वर्तमान में सरकारी बिजली कंपनियों के अतिरिक्त निजी कंपनियों को बिजली आपूर्ति का कार्य दिया जाएगा। क्षेत्रीय सह संयोजक इंजी अमित सक्सेना ने कहा कि निजी बिजली कंपनियां सरकारी वितरण कंपनियों के नेटवर्क का बिना निवेश किए प्रयोग करेंगी। निजी कंपनियां केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बिजली देंगी।
घाटे वाले ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं को सरकारी कंपनी घाटा उठाकर बिजली देने को विवश होंगी। इससे पहले से ही आर्थिक संकट से कराह रही सरकारी बिजली कंपनियों की माली हालत और खराब हो जाएगी। किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं पर घाटे का बोझ बढ़ेगा। विकास तिवारी ने कहा कि आयकर में भी किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई। रामअवतार, रवि तिवारी, रामचरण ने सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण की घोषणा की भर्त्सना की। इस मौके पर जनपद संयोजक शोभित दीक्षित, जनपद सह संयोजक सुनील कुमार मौजूद रहे।