झांसी। किले में महारानी लक्ष्मीबाई की गौरव गाथा को बयां करने के लिए लगभग एक दशक से पहले लाइट एंड साउंड शो को शुरू किया गया था। जिसमें भारतीय व विदेशी के लिए दो शो संचालित किए जाते है। लेकिन इसके बाद भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आमदनी नहीं होने पर इसका संचालन किया जा रहा है।
झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 19 नवंबर 2008 को दुर्ग के भीतर लाइट एंड साउंड शो को शुरू किया गया था। शो में फिल्म अभिनेत्री सुष्मिता सेन व अभिनेता ओमपुरी की आवाज में 1857 के गदर की दास्तां को बया किया जाता है। भारतीय के लिए शो का टिकट पचास रुपये व विदेशी सैलानियों के लिए 300 रुपये निर्धारित किया गया है। शुरूआत में तो लोगों ने शो को देखने में काफी रुचि दिखाई लेकिन अब शो में गिने चुने ही लोग आते हैं। वहीं विदेशी सैलानी भी शो को देखने में रुचि नहीं दिखा रहे है। किले में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण शो को जनरेटर द्वारा संचालित करना पड़ता है। जिस पर पांच सौ रुपये व्यय होता है। जेडीए द्वारा शो को संचालित करने के लिए दो ऑपरेटर, एक अवर अभियंता, क्लर्क व अनुचर को भी अतिरिक्त मानदेय अदा करना पड़ता है। वहीं, शो के टिकटों की आय का चालीस फीसदी पुरातत्व विभाग को अदा करना पड़ता है। जिसके चलते आमदनी कम होने के बाद भी शो को संचालित करना पड़ रहा है।
इस संबंध में जेडीए उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि स्थानीय लोगों की भावनाओं को देखते हुए शो को आमदनी कम होने के बाद भी संचालित किया जा रहा है। जल्द ही शो को डिजिटल करने की योजना को तैयार किया जाएगा। जल्द ही शो को डिजिटल किया जाएगा।