झांसी। जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. राजेंद्र सिंह की मां लाड़कुमारी के हत्यारों को मंगलवार को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साढ़े चार साल पहले लूट के इरादे से घर में दाखिल हुए घरेलू नौकर और उसके दोस्त ने बेरहमी से घटना को अंजाम दिया था।
सिविल लाइन निवासी डा. राजेंद्र सिंह का पुश्तैनी घर थाना कोतवाली इलाके में सैंयर गेट बाहर स्थित है। यहां उनकी गैस एजेंसी का ऑफिस भी है। उनकी मां लाड़कुमारी (85) दिन में पुश्तैनी घर में चली जाती थीं। पांच जुलाई 2017 की शाम वो घर में अकेली थीं। इसी दरम्यान उनका घरेलू नौकर सुकुवां - ढुकुवां कॉलोनी निवासी प्रमोद रायकवार घर पर पहुंचा। उसके साथ उसका दोस्त हाइडिल कॉलोनी निवासी अभिषेक सिंह चंदेल उर्फ बंटी भी था। घर के भीतर दाखिल होते ही उन्होंने लूटपाट शुरू कर दी। इसका जब वृद्धा ने विरोध किया तो उन्होंने बेरहमी से उसे मौत के घाट उतार दिया। वृद्धा के सिर पर वार किया गया था और गला भी काटा गया था। शाम को जब डा. राजेंद्र सिंह घर पहुंचे तो उन्हें घर की अलमारियां खुली मिलीं। जबकि, मां का खून से लथपथ शव पड़ा हुआ था। घर में जगह-जगह खून फैला हुआ था। पुलिस पड़ताल के उक्त दोनों आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिस पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
लोक अभियोजक कपिल करौलिया व केशवेंद्र सिंह ने बताया कि विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम इंदु द्विवेदी की अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई बाद अभियुक्त प्रमोद रायकवार व अभिषेक सिंह चंदेल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। इसके अलावा एक अन्य धारा में पांच-पांच साल के कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
फोटो (डा. राजेंद्र सिंह)
मां के साथ भरोसे का भी किया था नौकर ने कत्ल
झांसी। मृतका के पुत्र डॉ. राजेंद्र सिंह ने फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत से न्याय की पूरी उम्मीद थी। इस दरम्यान अपनी मां को याद कर उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि उनकी मां बहुत हिम्मती थीं और शरीर से भी मजबूत थीं। आखिरी वक्त तक उन्होंने हार नहीं मानी थी और हत्यारों से उलझी रहीं थीं। उन्हें बेरहमी से मारा गया था। अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाकर सही न्याय किया है। उन्होंने कहा कि उस दिन उनकी मां का ही नहीं, बल्कि भरोसे का भी कत्ल हुआ था। नौकर प्रमोद रायकवार उनके यहां तथा उनकी बहन के घर पर भी काम करता था। परिवार के सभी लोगों का वो भरोसेमंद था। कभी सोचा नहीं था कि वो ऐसी घटना को अंजाम दे डालेगा।