झांसी। शहर की बड़ी धरोहर में शुमार लक्ष्मी तालाब भी लगातार सिकुड़ रहा है। पहले कभी यह तालाब 83 एकड़ में था लेकिन अब केवल 59 का ही रह गया है। इतना ही नहीं खसरा खतौनी में दर्ज 25 कुएं भी गायब हैं। पांच पहाड़ियों की पंद्रह एकड़ भूमि भी अब ढूंढे नहीं मिल रही। यह मामला प्रकाश में आने के बाद मंडलायुक्त ने जांच बैठा दी है। एक कमेटी का गठन किया है तो सारे रिकार्ड देखने के बाद ताजा रिपोर्ट तैयार करेगी।
लक्ष्मी तालाब के सौंदर्यीकरण की योजना 2015 में शुरू हुई थी। इसके लिए 54 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया। इस बजट से लक्ष्मी तालाब में गिरने वाले नालों के पानी को रोकना, तालाब की सफाई, नाले के पानी को साफ करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण और तालाब से ट्रीटमेंट प्लांट तक पाइप लाइन डालने का काम होना था। तालाब की सफाई का काम पूरा हो गया और नालों का रास्ता बदल दिया गया है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा हो गया है। अब सौंदर्यीकरण के अन्य काम चल रहे हैं। लेकिन, इस बीच लक्ष्मीताल की भूमि पर बड़े अतिक्रमण की बात सामने आई है। खसरा खतौनी में जो भूमि का रिकार्ड दर्ज है वह हकीकत में अब नहीं है। अतिक्रमण का मामला शासन से लेकर प्रशासन तक गूंज रहा है। श्री उदासी बाबा व्यायाम सेवा संघ व तालाब संघर्ष समिति लगातार मुद्दे को उठा रही है। व्यायाम सेवा संघ के अशोक कुमार तिवारी गुरु ने बताया कि 17 वीं शताब्दी के गुसाइयों के समय के तालाब के आसपास 25 कुएं थे। अब उनका अस्तित्व समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तालाब आदि स्थानों की जमीन के नाप के लिए कुओं को आधार बनाया जाता था, लेकिन अब कुएं ही शेष नहीं बचे हैं तो तालाब की जमीन भी खतरे में पड़ गई है। उधर, तालाब संरक्षण समिति के संयोजक डा. सुनील तिवारी ने बताया कि तालाब के निकट पांच पहाड़ियां थीं। इनकी गाटा संख्या 1237, 1245, 77, 368 एवं 1329 है। इनमें अंकित जमीन लगभग 15 एकड़ है। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम 1952 के अभिलेखों आधार पर इनकी जांच होनी चाहिए। पूर्व के अभिलेखों के अनुसार 83.62 एकड़ भूभाग जलभराव वाला है। ॉ
मंडलायुक्त ने किया समिति का गठन
मंडलायुक्त डा. अजय शंकर पांडेय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच को एक कमेटी बना दी है। यह कमेटी पुराना रिकार्ड देखकर पड़ताल करेगी। लक्ष्मीताल की पहले कितनी जमीन थी और अब कितनी है। जांच टीम में अपर आयुक्त नगर निगम, सचिव झांसी विकास प्राधिकरण और भूगर्भ संरक्षण अधिकारी शामिल किए गए हैं।
अतिक्रमण को लेकर एनजीटी ने मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार को झांसी के लक्ष्मी ताल के आसपास अतिक्रमण की शिकायतों की जांच कर कार्रवाई करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी अध्यक्ष जज आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इसमें यूपी शहरी विकास के मुख्य सचिव, झांसी विकास प्राधिकरण का प्रतिनिधि और झांसी के जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं। यह याचिका गिरिजा शंकर राय ने दायर की है, इसमें कहा गया है कि झांसी के लक्ष्मी ताल के चारों तरफ अतिक्रमण कर लिया गया है। यूपी सरकार ने झांसी विकास प्राधिकरण और मास्टर प्लान 2021 का गठन किया था। झांसी में पर्यटकों को लुभाने के लिए बड़े पार्क को विकसित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉट काटे गए। झांसी विकास प्राधिकरण ने 23 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, लेकिन कार्रवाई पूरी नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने झांसी विकास प्राधिकरण की ओर से 29 मार्च 2019 के उस आदेश का जिक्र किया है, इसमें उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम की धारा 27 के तहत अतिक्रमणकारियों को हटाने की बात कही गई है। एजेंसी