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कोरोना काल में मौत के बाद शवों का भी हो रहा सौदा

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कई कर्मचारी मानवता को तार-तार करने में जुटे हुए हैं। अभी रेमडेसिविर इंजेक्शन की चोरी का मामला ठंडा नहीं हुुआ है कि अब कोरोना से मरने वालों शव देने तक में पैसे मांगने की शिकायतें कॉलेज प्रशासन तक पहुंचने लगी हैं। कुछ मामलों में तो कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई तक की है।
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कोरोना की दूसरी लहर से हालात बदतर होते जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में 15 से 20 मौतें हो रही हैं। इनमें कई झांसी की होती हैं तो कुछ गैर जनपदों की। कोविड अस्पताल में आउटसोर्सिंग पर रखे गए कुछ कर्मचारी मानवता को तार-तार करते हुए इस महामारी में उगाही पर उतारू हैं। कर्मचारी शव देने में भी पैसे की मांग कर रहे हैं। ऐसी कई शिकायतें मेडिकल कॉलेज प्रशासन के पास भी पहुंच रही हैं। हालांकि, अब तक किसी के भी खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों के भी हौसले बुलंद हैं।
केस-1
ईएमओ के परिजनों से की गई मांग
मेडिकल कॉलेज में एक वार्ड ब्वॉय द्वारा इमजरेंसी मेडिकल ऑफिसर के परिजनों से कुछ पैसे लेकर मृतक का शव देने की मांग की गई। इसकी शिकायत प्राचार्य तक पहुंची। हालांकि, जांच में ये पुष्टि नहीं हो सकी। मगर वार्ड ब्वॉय को तत्काल प्रभाव से डेडबॉडी डिस्पोजल टीम व रिसेप्शन काउंटर से हटा दिया गया। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि कहीं न कहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भी शिकायत में सच्चाई मिली होगी, तभी ये कार्रवाई हुई।
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केस-2
शिकायत पर सीएमएस लगा चुके फटकार
मेडिकल कॉलेज में एक लावारिस की कोविड अस्पताल में मौत हो गई। उसके अंतिम संस्कार के लिए खुद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने अपने पास से पैसे एंबुलेंस स्टाफ को दिए। इसके बाद एंबुलेंस स्टाफ ने कर्मचारी से शव को रखवाने के लिए बोला तो वो पैसे की मांग करने लगा। मामले की शिकायत सीएमएस तक पहुंची तो उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को फटकार लगाई और फिर शव एंबुलेंस में रखवाया।
यदि शव देने में कोई भी कर्मचारी पैसे की मांग करता है तो सीधे आकर शिकायत दर्ज कराएं। उसे सीधे नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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