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परिवार का साथ देना न महकमे को पसंद आया न इसके कर्णधारों को

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झांसी। इस्तीफा बम फोड़ कर पुलिस महकमे में सनसनी फैला देने वाले पीपीएस अफसर महेश चंद्र सोनकर ने व्हाट्सएप पर एक भावुक पोस्ट लिखकर उसे अपने सहकर्मियों संग साझा किया। उन्होंने बड़े भावुक अंदाज में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि परिवार ने उनका हर मुश्किल में बखूबी साथ दिया लेकिन आज जब उनके सामने परिवार के साथ खड़े होने का मौका आया, तब यह न तो महकमे को पसंद आया और न उसके कर्णधारों को।
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सीओ ने काफी लंबी पोस्ट में लिखा कि वह पिछले 12 साल से पूरी निष्ठा एवं मनोयोग से पद के कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। जैसी भी परिस्थितियां आईं, परिवार में कोई बीमार हो अथवा मर गया हो, अपनी ड्यूटी हमेशा पूरी की। इसके पीछे पत्नी का सहयोग रहा। आज जब महामारी काल में परिवार को मेरी जरूरत पड़ी, तब विभाग और इसके कर्णधार को ये गंवारा नहीं हुआ कि मुझे मेरे परिवार के साथ इस विपत्तिकाल में अकेला छोड़ दे। मदद करने के बजाए प्रताड़ना करना शुरू कर दी।
सीओ ने आगे लिखा कि पत्नी को पिछले कई दिनों से हाई डिग्री का फीवर रह रहा है। उसके पहले 20 अप्रैल को मुझे हाई डिग्री फीवर था। पांच बार टेस्ट कराया। कोविड निगेटिव रिपोर्ट आने पर दवाइयां लेकर काम किया। पत्नी ने मेरी पूरी देखभाल की। मेरी पत्नी खुद होम्योपैथी डॉक्टर हैं। उसकी मदद से मैं जल्दी ठीक हो गया। 30 अप्रैल को पत्नी की रिपोर्ट पॉजीटिव आ गई। इस वजह से पत्नी को आइसोलेट होना पड़ा। घर में चार साल की बेटी अकेली हो गई। मां को सबसे बड़ी चिंता उस बच्ची की थी। किसी दूसरे अंजान फॉलोवर के भरोसे उसे नहीं छोड़ा जा सकता। पत्नी और बच्ची की देखभाल के लिए दूरभाष के जरिए एक मई को एसएसपी से आकस्मिक अवकाश मांगा लेकिन इस कठिन समय में साथी अधिकारी के रुप में मेरे साथ संवेदनापूर्ण व्यवहार के बजाए मेरी ड्यूटी मतगणना में लगा दी। एसएसपी से दूरभाष पर अवकाश के लिए निवेदन किया लेकिन, उन्होंने बच्ची को फालोअर के भरोसे छोड़कर ड्यूटी पर आने की बात कही और फोन काट दिया। इसके बाद जब मेरी छुट्टी स्वीकृत हुई तो इसके पहले भी तो हो सकती है। एक समाज के रुप मेें हम और कितना गिरेंगे। मेरा त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद भी मेरा परिवार दुखी नहीं होगा, क्योंकि हम सब साथ में होंगे। जीवन यापन के लिए कुछ न कुछ तो कर ही सकता हूं।
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फालोवर हटाने जाने की नाराजगी में उठाया कदम: एसएसपी
एसएसपी रोहन पी कनय का कहना है कि सीओ महेश सोनकर के इस्तीफा दिए जाने के पीछे अवकाश न दिया जाना बड़ी वजह नहीं है, बल्कि उनके यहां स्वीकृत से अधिक फालोवर काम कर रहे थे। यह फालोवर उन्होंने हटा दिए। इसके बाद भी सीओ महेश ने अलग से फालोवर बुला लिए। उनके मना करने पर महेश बुरा मान बैठे। ड्यूटी में लापरवाही की भी शिकायतें थीं। चुनाव ड्यूटी में उनकी ओर से लापरवाही बरती गई। भोजला मंडी से बिना बताए वह अनुपस्थित रहे। वजह पूछने पर तैश में आकर इस्तीफा दे देने की बात कही। थोड़ी देर बाद व्हाट्सएप पर इस्तीफा भेज दिया। उनके इस्तीफे को आगे मुख्यालय भेज दिया गया है। एसएसपी का दावा है कि महेश की छुट्टी स्वीकृत की गई थी।
बिना छुट्टी लिए छह-छह माह लगातार काम करते हैं पुलिसकर्मी
- आज तक अमली जामा नहीं पहन सकी साप्ताहिक अवकाश योजना
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिस अवकाश के न मिलने से सीओ जैसे पद पर तैनात पुलिसकर्मी को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा, उस समस्या से सिर्फ वही नहीं बल्कि हर दूसरा पुलिसकर्मी जूझ रहा है। कोरोना काल के चलते पुलिस पर काम का बोझ और बढ़ गया, जबकि जनपद में पुलिस फोर्स की संख्या बेहद सीमित है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को नियमित अवकाश ही नहीं मिल पाता। हालत यह हैं कि सामान्य तौर पर छह-छह माह तक बिना अवकाश लिए पुलिसकर्मियों को रोजना 12-15 घंटे तक लगातार ड्यूटी करना पड़ रही है। इसमें अफसरों से लेकर सिपाही तक शामिल हैं। थानों में तैनात पुलिसकर्मियों की दशा छुट्टियों के मामले में बेहद खराब है। पिछले साल कभी लॉकडाउन, दशहरा, दीपावली, होली, कोराना ड्यूटी फिर पंचायत चुनाव की वजह से लगातार व्यस्त रहना पड़ा। कानून-व्यवस्था संभालने के नाम पर सड़क में ही मौजूद रहना पड़ा। नियमित अवकाश नहीं मिलने से आधे से अधिक पुलिसकर्मी मधुमेह, दिल की बीमारी, अवसाद, हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। पुलिसकर्मियों की इन परेशानियों को देखते हुए कुछ समय पहले थाना स्तर पर साप्ताहिक अवकाश का चलन शुरू करने का निर्णय लिया गया लेकिन फोर्स की कमी के चलते यह योजना भी परवान नहीं चढ़ सकी।
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