नगर में इस वर्ष दशहरा क ी 154 वर्ष पुरानी परंपरा टूट जाएगी। क्योंकि बांधव समिति, शहर इस वर्ष से न तो लक्ष्मी तालाब में दुर्गा प्रतिमा का विजर्सन करेगी और न ही शोभायात्रा में भाग लेगी। लक्ष्मी तालाब के पानी के दूषित होने के चलते यह निर्णय लिया गया है। समिति अब कालीबाड़ी मंदिर में पानी का कुंड तैयार कर दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करेगी।
उल्लेखनीय है कि कालीबाड़ी में बंगाली समाज की ओर से वर्ष 1861 से सार्वजनिक रूप से दुर्गा पूजा प्रारंभ हुई थी, जो कुछ वर्षों पश्चात नए कालीबाड़ी परिसर में होने लगा। लेकिन दशहरा पर दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन हमेशा लक्ष्मी तालाब में ही होता रहा। इस दौरान निकलने वाली प्रतिमा विसर्जन की शोभायात्रा नगर वासियों के लिए सदैव आकर्षण व श्रद्धा का केंद्र रही। हालांकि इस बीच नगर के अधिकांश हिस्सों में शारदीय नवरात्र पर दुर्गा प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित की जाने लगीं, लेकिन जन सामान्य में सदैव बंगाली समाज की दुर्गा पूजा को विशेष सम्मान व धार्मिक महत्व मिलता रहा।
वहीं लक्ष्मी तालाब में प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने की जानकारी देते हुए बांधव समिति के सचिव शांतनु घोष ने बताया कि हम सभी वैदिक रीति व पवित्र भाव के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा को प्रतिष्ठापित करते हैं। ऐसे में गंदगी से भरे अपवित्र जल में कैसे वह प्रतिमा का विसर्जन करें। उनके अनुसार लक्ष्मी तालाब की सफाई के लिए कई बार प्रशासन से मांग की गई, लेकिन कभी ठोस पहल नहीं हुई।
कुंड के लिए हुआ भूमिपूजन
शुक्रवार को बांधव समिति के सदस्यों ने वैदिक मंत्रों के बीच कालीबाड़ी में कुंड के लिए भूमि पूजन किया। इस दौरान सचिव शांतनु घोष, सिद्धार्थ चटर्जी, जॉय चटर्जी, रविशंकर चटर्जी, अरिंदम घोष, प्रदीप तरफदार, माधो घोष, जाधव घोष, केशव घोष, अभय पाल, सुबीर सेन, मिथुन, अभिषेक आदि मौजूद रहे।
कुंड में गंगा सहित देश भर की नदियों का होगा पवित्र जल
कालीबाड़ी में मां की प्रतिमा के ठीक सामने 12 से 15 फीट की गहराई व करीब 5 से 6 फीट चौड़ाई वाला कुंड बनेगा, जिसमें गंगा, यमुना, सिंध, कावेरी, गोदावरी, बेतवा सहित देश भर की कई नदियों का पवित्र जल भरा जाएगा। प्रतिमा को कुंड के जल में विसर्जित किया जाएगा। समिति के पूर्व सचिव जॉय चटर्जी के मुताबिक दीपावली पर पूजा होने वाली काली प्रतिमा व बसंत पर पूजी जाने वाली सरस्वती प्रतिमा को भी इसी कुंड में विसर्जित किया जाएगा। बताया कि दशहरा के दिन वृहद स्तर पर ढाक वादन व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा।