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कूड़ाघरों पर कब्जे होते रहे, अफसर सोते रहे

Mon, 06 Mar 2017 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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nagar nigm, jhansi news - फोटो : demo
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कहीं धर्मस्थल तो कहीं मकान बनाकर लोगों ने कूड़ाघरों पर कब्जा कर लिया है। अब कचरा सड़कों पर डाला जा रहा है। शहर के 24 से अधिक कूड़ाघरों पर कब्जे हो गए हैं और नगर निगम के अफसर टुकर-टुकर यह सब होता देख रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि कंटेनर (कूड़ेदान) कुछ ही देर में ओवरफ्लो हो जाते हैँ और तब कचरा सड़कों पर फैल जाता है। नगर निगम के डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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नगर निगम के अंतर्गत 417 कचरा घर हैं। इसमें 24 का तो अस्तित्व ही खत्म हो गया, यानी वहां कब्जे हो गए। आसपास के लोग अब सड़क पर कचरा डाल रहे हैं। इससे न केवल राहगीरों को परेशानी हो रही है, बल्कि बीमारियां फैलने की आशंका है। खास बात यह है कि शहर के 45 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है, लेकिन जगह-जगह रास्तों में लगे गंदगी के ढेर बता रहे हैं कि यह सब कागज पर ही है।   अखिल भारतीय स्वच्छकार एसोसिएशन ने नगर आयुक्त को 17 कचरा घरों की सूची दी थी, जहां कचराघरों पर अवैध कब्जे हो गए हैं। लेकिन, कब्जा हटाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस कारण सफाई कर्मियों को कचरा डालने में परेशानी हो रही है। सड़कों तक कचरा के ढेर लगे होने से मच्छर पनप रहे हैं। वाहन चालक गंदगी से बचने के लिए दूर से निकलने की कोशिश करते हैं और इससे ट्रैफिक जाम भी हो जाता है।

इंसेट
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नहीं बन रहे कचराघर
चिह्नित कचरा स्थल खुले हुए हैं। इस कारण लोगों की निगाह इस जगह पर रहती है। वह मौका पाकर कब्जा कर लेते हैं। इसके बाद नगर निगम से शिकायत की जाती है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। यदि चिह्नित कचरा घरों की जमीन को घेर दिया जाए तो फिर जमीन पर कब्जा नहीं होगा और जगह सुरक्षित रहेगी।
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कहीं कंटेनर खरीद का खेल तो नहीं  
कचरा घर की जमीन नहीं घेरने के पीछे नगर निगम की कंटेनर खरीद की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। एक कचरा घर को घेरने के लिए बमुश्किल पंद्रह से बीस हजार रुपये एक बार में खर्च होगा, लेकिन कचरा का कंटेनर खरीदने में हर साल तीन से चार लाख रुपये ठिकाने लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कचरा घरों की जगह पर अवैध कब्जे हो रहे हैं।

फर्जीवाड़ा 
नगर निगम का दावा है कि शहर के 45 वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि डोर-टू-डोर कचरा लिया जा रहा है तो सड़कों पर कचरे के ढेर कहां से लग रहे हैं। लगता है कि डोर-टू-डोर कलेक्शन कागजों तक सीमित है।

इन कचराघरों पर हो गए कब्जे
- बंगला घाट
- इमामबाड़ा
- सूजे खां खिड़की
- सैंयर गेट कलारी के पास
- मरकजी मस्जिद
- उन्नाव गेट बाहर श्मशान घाट के पास
- सैंयर गेट कुमरयाना लाले की चक्की
- शिवाजी नगर नाले की पुलिया
- शिवाजी नगर मेन रोड 
- गनपत खिड़की पंचकुइयां
- छोटी माता मंदिर आजाद गंज
- जर्मनी रोड पंडित विवाह घर
- खदान वाला रोड नाथ की कोठी
- नेहरू पार्क के पीछे सीपरी बाजार
- मैला की टौरिया
- साहनी कालोनी गेट के पास
- सीपरी कलारी पुलिया के पास
- एडी बाबा चौराहा
- घास मंडी
- नारायण बाग मार्ग
- कुंजरयाना 

लोगों से बातचीत
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फोटो
आवारा जानवर करते हैं परेशान 
सड़क पर कचरा डाले जाने से आवारा जानवर घूमते हैं। कई बार सांड़ आपस में लड़ जाते हैं, जिससे आने-जाने वाले राहगीर भी उनकी चपेट में आ जाते हैं। यदि सड़क पर कचरा न डाला जाए तो यह समस्या स2माप्त हो जाएगी।
- कालीचरन जारौलिया
बड़ागांव गेट बाहर

सभी लोग कचरादान का प्रयोग करें
बड़ाबाजार में दुकानों के खुलने से पहले सफाई हो जाती है। जब दुकानें खुलती हैं तो दुकानदार झाड़ू लगाकर कचरा बाहर डाल देते हैं। यदि सभी लोग कचरा को कचरा दान में डालें तो गंदगी नहीं फैलेगी। इससे शहर साफ-सुथरा रहेगा।
- रमेश चंद्र मिश्रा 
घास मंडी

कचरा घरों पर कब्जा गंभीर मामला
कचराघर नगर निगम की संपत्ति हैं, यदि कोई कब्जा करता है तो नगर निगम को चाहिए कि एफआईआर कराई जाए ताकि किसी की हिम्मत कब्जा करने की न पड़े। लेकिन, विभाग द्वारा ढुलमुल रवैया अपनाया जा रहा है।
- अरुण कुमार द्विवेदी
पूर्व पार्षद

कचरा घर गायब हो गया
घास मंडी में वर्षों पुराना कचरा घर था। यहां आसपास के सभी परिवारों का कचरा और बाजार की दुकानों का कचरा डाला जाता था, लेकिन कचरा घर रातोंरात गायब हो गया। इस कारण बाजार में गंदगी रहती है। नगर निगम को बाजार की गंदगी की ओर ध्यान देना चाहिए। 
- बृजेंद्र यादव
कारोबारी

ऐसे तो बनने से रहा स्मार्ट शहर 
जब शहर की सफाई और कचराघरों की ओर ही नगर निगम का ध्यान नहीं है तो ऐसे में शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने की बात बेकार है। केवल कागजों में सफाई से कुछ नहीं होता। हकीकत देखनी है तो अफसरों को शहर में घूमना चाहिए।
- भारत भूषण बुधौलिया
समाजसेवी

बगीचा में गंदगी बेशुमार
शंकर सिंह का बगीचा में कचरा का ढेर लगा रहता है। यहां गंदगी बेशुमार रहती है। यहां से निकलने वालों को बदबू से परेशानी होती है। नगर निगम में शिकायत की जाती है, तो सफाई हो जाती है। लेकिन, फिर से स्थिति जस की तस हो जाती है।
- पीके उपाध्याय 
बड़ा बाजार
 
कोट
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कवर्ड करने का विचार
मानता हूं कि कूड़ाघरों पर कब्जे हो रहे हैं। अब इनके लिए नई योजना बनाई जा रही है। अब कचरा घरों को कवर्ड करने पर विचार चल रहा है। जल्द ही कोई फैसला होगा। तब न तो कचरा सड़कों पर फैलेगा और न ही कब्जे होंगे।
- डा. राकेश बाबू
नगर स्वास्थ्य अधिकारी

सत्ताधारियों के दबाव में अफसर
शिकायतें आई हैं लेकिन सत्ताधारियों के दबाव में अफसरों ने कोई काम नहीं किया। अब सरकार बदलने की उम्मीद है। नई सरकार का गठन होने पर कब्जे हटवाए जाएंगे।
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किरण वर्मा, महापौर
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