पिछले तीन साल से दैवी आपदा के शिकार किसानों के लिए इस बार मौसम का मिजाज खुशहाली का संदेश लेकर आया है। मौसम की अनुकूलता की वजह से खेतों में फसलें लहलहा रही हैं। इस बार अच्छे उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है।
क्षेत्र के किसान पिछले तीन सालों से प्रकृति के कोप के शिकार होते चले आ रहे हैं। 2014 में कम बारिश की वजह से उत्पादन अच्छा नहीं हो पाया था। इसके बाद 2015 में शुरुआत में तो मौसम किसानों के साथ रहा, लेकिन फरवरी माह के अंत में दो दिन हुई ओलावृष्टि व अतिवृष्टि की वजह से खेतों में खड़ी रबी की फसल चौपट हो गई थी। जिले में फसलों को 3.57 अरब का नुकसान हुआ था। इसके अगले सीजन में खेत सूखे की मार से बेजार हो गए थे। हालात यह रही थी कि पानी की कमी और मिट्टी में नमी न होने की वजह से पचास फीसदी खेतों में बुवाई तक नहीं हो पाई थी। तेज गर्मी की वजह से उत्पादन भी कमजोर हुआ था।
लेकिन, इस बार मौसम किसानों के साथ है। पहले मानसून मेहरबान रहा और उसके बाद सर्दी ने भी साथ दिया। हालांकि, बीच में हल्की बारिश के साथ ओले भी गिरे, लेकिन वह फसलों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाए। मौसम के अनुकूलता का ही नतीजा है कि इन दिनों खेत हरे भरे नजर आ रहे हैं। मटर, मसूर और सरसों की कटाई शुरू हो चुकी है। होली के बाद गेहूं की कटाई भी शुरू हो जाएगी।
इस बार में जिला कृषि अधिकारी डा. बी आर मौर्य ने बताया कि रबी के इस सीजन में कुदरत किसानों पर मेहरबान रही है। फसलें अच्छी तैयार हुई हैं। इससे शानदार पैदावार की उम्मीद है। मटर, मसूर, सरसों की कटाई शुरू हो गई है। धूप अच्छी खिल रही है। किसान फसलों की ढंग से मढ़ाई कर उन्हें सुखा लें।