झांसी। खेती-किसानी करने वाले किसान अब अपनी खुद की कंपनी बना सकेंगे। कारपोरेट कंपनी की तर्ज पर इनमें सीईओ होंगे। संचालन के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टरर्स तैनात होंगे। केंद्र सरकार भी इसके लिए किसानों को मदद करेगी। सरकारी मदद से प्रत्येक ब्लॉक में दो एफपीओ बनवाए जाएंगे। सरकार तीन साल तक इनको वित्तीय मदद मुहैया कराएगी।
एफपीओ (कृषि उत्पादक समूह) के जरिए किसान समूह बनाकर फसल के उत्पादन से लेकर विपणन तक की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह एक लिमिटेड कंपनी की तर्ज पर काम करेगा। बता दें, बुंदेलखंड की उर्द, मूंग, मूंगफली, तिल आदि की काफी मांग है। दलिया बनने में इस्तेमाल होने वाला कठिया गेहूं की भी जबर्दस्त डिमांड मांग है लेकिन, किसानों को इसका सीधा फायदा नहीं होता। सरकार का मानना है अगर समूह में इसका उत्पादन करने के साथ बिक्री की जाए तब किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है। इसके लिए यह समूह बनाए जा रहे हैं हालांकि एफपीओ पंजीकरण के लिए न्यूनतम सौ किसानों की आवश्यकता होगी।
प्रत्येक एफपीओ बकायदा कंपनी सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत होगा। इसके बाद किसान अपनी इस कंपनी की मदद से फसल उत्पादों का विपणन भी कर सकेंगे। उनकी कंपनी ई-मंडी से भी आसानी से जुड़ेगी। एफपीओ को खाद, बीज आदि के लाइसेंस में भी प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी सोसाइटी एक्ट में पंजीकरण होने की वजह से एफपीओ का पूरा काम कंपनी की तर्ज पर ही चलेगा। कंपनी में किसान ही एमडी का जिम्मा संभालेंगे। इसको होने वाली आयकर से भी पूरी तरह मुक्त रखा गया है। केंद्र सरकार ने दस हजार एफपीओ चालू वित्तीय वर्ष में पूरे देश भर में बनाए जाने का लक्ष्य तय किया है। उसके मुताबिक जनपद में प्रत्येक ब्लॉक से दो एफपीओ बनाए जाने हैं। कृषि अधिकारियों का कहना है इस योजना के जरिए बनाए गए एफपीओ को तीन साल तक एफपीओ संचालन में आने वाला खर्च दिया जाएगा। इसके अलावा उनको पंजीकरण में भी मदद की जाएगी। कोरोना संक्रमण के चलते यह काम अगले माह से आरंभ होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रभारी उपनिदेशक कृषि कमलेश सिंह के मुताबिक सरकार एफपीओ को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। इसके जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा।