झांसी। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बीच एक अरसे से केन-बेतवा नदी के पानी बंटवारे का विवाद निपटने के कगार पर है। दोनों सूबे के अफसरों के बीच पानी का फार्मूला करीब-करीब तय हो चुका है। अंतिम मुहर दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को लगानी है। जल्द ही दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री इस संबंध में बैठक कर सकते हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना का खाका वर्ष 2008 में तैयार किया गया था। प्रारंभिक दौर में यह योजना नौ हजार करोड़ रुपये की बनाई गई थी। लेकिन, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच पानी के विवाद में फंसी इस योजना की लागत 19 हजार करोड़ तक पहुंच गई। इसकेजरिए मप्र एवं उप्र के तीन-तीन जिलों की कुल 6,35,661 हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी है। परियोजना के मुताबिक उप्र के बांदा व मप्र के छतरपुर जिले की सीमा पर बोधन गांव के निकट गंगोई बांध से केन नदी को तीस मीटर चौड़ी कंक्रीटनहर बनाकर आगे ले जाना है। धसान नदी पर एक टनल (सुरंग) बनाकर इसे आगे बढ़ाया जाएगा। छतरपुर के हरपालपुर से होकर उप्र के मऊरानीपुर बार्डर से मप्र के जतारा तहसील के गांवों से होकर इस नहर को बरुआसागर बांध के ऊपर से होते हुए ओरछा के निचले हिस्से में स्थित नोट घाट पुल में मिला दिया जाएगा। नहर का पूरा डूब व प्रभावित क्षेत्र मध्यप्रदेश में है। इसी वजह से मप्र अधिक पानी पर हक जाता रहा जबकि उप्र दूसरी परियोजनाओं का हवाला देते हुए बराबर पानी की मांग कर रहा। मप्र की ओर से बारिश के दौरान पानी छोड़ने की बात कही जा रही थी जबकि उप्र सभी फसली सीजन में बराबर पानी मांग रहा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से गतिरोध चल रहा था लेकिन, पिछले माह दोनों सूबे के उच्च अफसरों के बीच कई चक्रों में हुई वार्ता के दौरान अब पानी बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है। पिछले माह केंद्रीय मंत्री ने भी इस संबंध में जानकारी दी थी। उन्होंने जल्द इस योजना को शुरू होने के संकेत दिए थे। अफसरों का कहना है दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री की बैठक में इस पर अंतिम निर्णय होना है।
इतना रकबा होगा सिंचित
केन बेतवा लिंक परियोजना शुरू होे जाने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन सिंचित हो जाएगी। उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा व झांसी जिले में सिंचित भूमि 2,65,780 हेक्टेयर हो जाएगी जबकि मप्र के छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जिले में बढ़कर 3,69,881 हेक्टेयर हो जाएगी।
पानी बंटवारे को लेकर सहमति करीब-करीब बन चुकी है। अब वार्ता अंतिम दौर में है। उम्मीद है कि कुछ समय के भीतर यह प्रोजेक्ट आरंभ हो जाएगा। आरपी सिंह
मुख्य अभियंता, परियोजना