फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘कौशल’ मिला, पर नहीं हुआ ‘विकास’

Thu, 14 Jan 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। बेरोजगारों को हुनरमंद बनाकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक साल पूर्व शुरू हुआ ‘कौशल विकास मिशन’ बेरोजगारों की कसौटी पर अब तक खरा नहीं उतर पाया है। प्रशिक्षण देने के बाद यह योजना अधिकांश बेरोजगारों को काम दिलाने में अब तक नाकाम साबित हुई है।
विज्ञापन


कौशल विकास मिशन के तहत 14 से 35 वर्ष की आयु तक के पांचवीं पास से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त बेरोजगारों तक के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था है। बेरोजगारों को यह प्रशिक्षण नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। तदुपरांत, विभिन्न कंपनियों से संपर्क कर प्रशिक्षण प्राप्त बेरोजगारों की नौकरी का भी बंदोबस्त करना होता है।

लेकिन, इस मामले में इस योजना की गति बेहद धीमी है। जिले में अब तक 411 बेरोजगारों को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लेकिन, इनमें से महज 167 को ही नौकरी मिल पाई है। अवशेष बेरोजगार रोजगार की बाट जोह रहे हैं।
विज्ञापन


283 हैं पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण सिर्फ आठ में
झांसी। कौशल विकास मिशन के तहत बेरोजगारों के प्रशिक्षण के लिए 34 ट्रेडों के 283 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। लेकिन, जनपद में आठ कोर्स ही संचालित किए जा रहे हैं। इनमें इलेक्ट्रिशियन डोमेस्टिक, रेफ्रीजेरेशन मैकेनिक, हास्पिटल रिसेप्शनिस्ट, हास्पिटल इंफॉर्मेशन असिस्टेंट, बैंकिंग, अकाउंटिंग, ब्यूटीशियन आदि शामिल हैं।

लक्ष्य से काफी दूर है प्रगति
झांसी। कौशल विकास मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले में 4,004 बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन इनमें से अब तक 2,299 के प्रशिक्षण की ही व्यवस्था हो पाई है। इनमें 411 का प्रशिक्षण पूर्ण हो गया है। जबकि, 1888 प्रशिक्षणरत हैं। यह स्थिति तब है, जबकि वित्तीय वर्ष की समाप्ति में सिर्फ ढाई माह ही शेष हैं।

योजना में रुचि नहीं है संस्थाओं की
झांसी। कौशल विकास मिशन के तहत सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिससे इसमें फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम ही है। जानकारों के अनुसार यही वजह है कि संस्थाएं इस योजना की सहगामी बनने में रुचि नहीं ले रही हैं, जिससे इसकी गति धीमी है।

मालूम हो कि योजना के तहत प्रशिक्षण देने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का चयन शासन स्तर पर होता है। संस्था को प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को प्रशिक्षण देने के एवज में 24 रुपये प्रति घंटा की दर से भुगतान किया जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम 500 से 760 घंटे तक के हैं। लेकिन, यह भुगतान बेरोजगार के प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत नौकरी लगने पर ही दिया जाता है। इसका संबंधित फर्म से सत्यापन कराया जाता है।

इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों की बायोमेट्रिक अटेंडेंस ली जाती है। अस्सी फीसदी उपस्थिति होने पर ही प्रशिक्षण पूरा माना जाता है। जानकारों के अनुसार उक्त प्रावधानों की वजह से योजना में फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम ही है। यही वजह है कि संस्थाएं इस योजना से जुड़ने में रुचि नहीं दिखा रही हैं, जिससे योजना की गति धीमी बनी हुई है।

‘कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त ज्यादातर लड़कियां बाहर नौकरी के लिए तैयार नहीं हैं। कई नौकरी प्राप्त करने के बाद उसे छोड़ चुकी हैं, जिससे आंकड़े अपेक्षानुरूप नहीं आ रहे हैं। हालांकि, रोजगार के लिए लगातार कंपनियों से संपर्क साधा जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई जा रही है।’
विज्ञापन

- रविकांत शुक्ला, डिप्टी कमिश्नर - उद्योग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें