झांसी। कश्मीर भारत की समस्या नहीं बल्कि एक ऐसा सांस्कृतिक दार्शनिक मार्ग प्रस्तुत करता है, जिससे भारत की समस्त समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अभिनव गुप्त का दर्शन देश की समस्या समाधान की कुंजी है। यह बात संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आए दर्शनशास्त्र के प्रो. रजनीश शुक्ल ने आचार्य अभिनव गुप्त की सहस्त्राब्दी समारोह समिति द्वारा आयोजित अभिनव संदेश यात्रा गोष्ठी में कहीं।
प्रो. शुक्ल ने बताया कि आचार्य अभिनव गुप्त ने आज से एक हजार वर्ष पूर्व कश्मीरी शैव दर्शन की व्याख्या की थी। उन्होंने आचार्य के दर्शन एवं व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला। आचार्य अभिनव की शिवयात्रा के हजार वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बीयू में अभिनव संदेश यात्रा पर एक गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि एवं जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र के निदेशक आशुतोष भटनागर ने बताया कि अभिनव संदेश यात्रा 11 जून को कश्मीर पहुंचेगी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अरविंद दीक्षित ने जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कानपुर से आए श्रीष देव पुजारी ने संस्कृत भाषा की व्यापकता एवं महत्व पर प्रकाश डाला। अभिनव संदेश यात्रा को झांसी में अजय पंडित एवं मनीष लेकर आए। 30 मार्च को कांची धाम से शुरू हुई यह यात्रा 11 जून को कश्मीर में होगी। इस दौरान उन्होंने सभी से कश्मीर आने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि के रूप में अनिल श्रीवास्तव एवं रामचंद्र पांडेय मौजूद रहे।
संचालन डॉ. अनूप कुमार गुप्ता ने किया व आभार डॉ. मुकुल पस्तोर ने जताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने की। प्रदीप सरावगी, प्रो. एमएल मौर्या, डॉ. बालमुकुंद अग्रवाल, डॉ. बृजेंद्र राठौर, डॉ. प्रतीक अग्रवाल, डॉ. डीके भट्ट, अनिल बोहरे आदि मौजूद रहे।