झांसी। कानपुर डबल ट्रैक पर बुधवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त मोहम्मद लतीफ ने नंदखास से परौना स्टेशन के बीच डाली गई 32 किलोमीटर की दूसरी नई लाइन का निरीक्षण किया। उनके निरीक्षण के साथ ही इस लाइन को यातायात के लिए खोल दिया गया है।
बुधवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त ने उक्त सेक्शन का विशेष ट्रेन से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उक्त सेक्शन में आने वाले नंदखास, मोंठ, एरच रोड, परौना स्टेशन पर नवनिर्मित भवन, ब्रिज, ट्रैक, सिग्नल इंस्टालेशन, ओएचई वायरिंग का परीक्षण किया। निरीक्षण ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाकर देखा गया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक आशुतोष, आरवीएनएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुराग, मुख्य सिग्नल इंजीनियर नीरज यादव, सीईटीडी संजीत कुमार, राजेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर सत्यप्रकाश मिश्र, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (द्वितीय) अखिल शुक्ला, मंडल इंजीनियर शोभनाथ, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता नितिन वर्मा, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अशोक प्रिय गौतम, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं टेलिकॉम अभियंता आशीष सैनी, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक शशिकांत त्रिपाठी, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं टेलिकॉम अभियंता अमित गोयल मौजूद रहे।
206 में 156 किलोमीटर का काम पूरा
झांसी - कानपुर डबल ट्रैक पर झांसी से भीमसेन के बीच 206 किलोमीटर तक काम होना है। इसकी जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को सौंपी गई है। अभी तक 156 किलोमीटर ट्रैक को यातायात के लिए खोला जा चुका है। इसमें झांसी- पारीछा के बीच 24 किलोमीटर, पारीछा से नंदखास के बीच 19 और पिरौना- एट- भुआ स्टेशन के बीच 27 किलोमीटर व सरसोकी व पुखरायां के बीच 17.585 किलोमीटर व चौराह पुखरायां व मलासा स्टेशनों के बीच 19 किलोमीटर का रास्ता पहले ही खोला जा चुका है।
अभी यह है दिक्कत
झांसी-कानपुर सिंगल रेलवे ट्रैक पर प्रतिदिन 40 से अधिक अप और डाउन की सवारी ट्रेनों का संचालन होता है। इतनी ही संख्या में मालगाड़ियां भी दौड़ती हैं। एक ट्रेन को निकालने में सामने आ रही दूसरी ट्रेन को नजदीक के रेलवे स्टेशन पर रोकना पड़ता है। इसका सीधा असर ट्रेनों के समय पालन पर पड़ता है।