इस बार कन्हैया के जन्म का पर्व भक्तों में तीन दिन मनेगा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के चलते हिंदू धर्म के विभिन्न मत जन्माष्टमी 14, 15 और 16 अगस्त को मनाएंगे।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद में अष्टमी की पर मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी मान्यता के आधार पर हिंदू धर्मावलंबी इसी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी मनाते हैं। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का दिन अलग-अलग है। अष्टमी 14 अगस्त की शाम 5:41 बजे से शुरू है, जो 15 अगस्त को दोपहर 3:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में भक्तों का एक बड़ा वर्ग विशेषकर स्मार्त संप्रदाय के लोग 14 क ो जन्माष्टमी मनाएंगे।
महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार 15 अगस्त को उदया काल में अष्टमी तिथि होने से वैष्णव मत के अधिकांश परिवारों व मंदिरों में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। हालांकि इस दिन रोहिणी नक्षत्र रात्रि 1:30 बजे से लगेगा, जो 16 अगस्त की रात 11:50 तक रहेगा। नक्षत्र के आधार पर पर्व मनाने वाले श्रद्धालु इस दिन जन्माष्टमी मनाएंगे।