झांसी। पिछले दिनों अहमदाबाद में दहेज के उत्पीड़न से तंग आकर जान देने वाली आयशा के मामले को जिले के उलेमाओं ने गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को महानगर में पठौरिया स्थित ईदगाह में जिले भर के उलेमाओं की बैठक हुई। जिसमें उलेमाओं ने बताया की इस्लाम में बैंड और डीजे हराम है। कहा कि जिन शादियों में दहेज मांगा जाएगा या डीजे बजाया जाएगा उन शादियों में काजी निकाह नहीं पढे़ंगे।
मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि इस्लाम में दहेज की मांग करने वालों पर अल्लाह की लानत होती है। दहेज का मांगना पूरी तरह से गैर इस्लामी है। ऐसे लोगों पर अल्लाह का अजाब नाजिल होता है। शादियों में बैंड और डीजे बजने से शैतान हावी रहता है। वहीं, इस्लाम में खड़े होकर खाना खाना की मनाही है। ऐसी शादियों में शहर का कोई भी काजी निकाह नहीं पढ़ाएगा। मौलाना शाने हैदर जैदी ने कहा कि दहेज मांगना लानत है। खुद्दार को अपने वाजुओं पर भरोसा करना चाहिए। कहा कि एक बाप सारी जिंदगी जोड़कर बेटी को दहेज के रूप में देकर विदा करता है। उसके बाद भी बेटियां आत्महत्या कर रही हैं। ऐसे लोगों को अल्लाह माफ नहीं करेंगे। हम सभी को नबी के बताए तरीके से ही निकाह करना चाहिए। दहेज, डीजे और खड़े होकर खाना खाने वाली शादियों से परहेज किया जाएगा। मौलाना याकूब ने कहा कि खड़े होकर खाना इंसानों की नहीं जानवरों की फितरत है। हम सभी को घर-घर तक इस बात को पहुंचाना होगा। संचालन और दुआ मौलाना सैफुद्दीन ने की। इस मौके पर मौलाना मुबीन कादरी, मौलाना सलमान कासमी, मौलाना ताहिरूल कादरी, मौलाना फुरकान, मुफ्ती खालिद, नूर अहमद मंसूरी, याकूब अहमद मंसूरी, हाफिज अमजद, नौशे मियां, मौलवी अजीम, कारी मसीहउद्दीन, हाफिज हसनैन, हाफिज रियाज, मुफ्ती इमरान समेत देवबंदी, बरेलवी और शिया मसलक के उलेमा मौजूद रहे।