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मनमाने तरीके से बांटा जा रहा अनुदान

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मनमाने तरीके से बांटा जा रहा अनुदान
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झांसी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत गलत ढंग से अनुदान राशि हासिल करने के मामले सामने आने के बाद इस योजना पर सवाल उठने लगे हैं। पात्रों को ही योजना का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मनमाने तरीके से अनुदान राशि बांटी जा रही है। संपन्न लोग भी यह धनराशि हासिल कर रहे हैँ। 22 मामले पकड़े जाने के बाद आवेदकों की जांच करने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली चर्चाओं में है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन आने के बाद डूडा द्वारा उसकी सत्यता के लिए सर्वे कराया जाता है। सर्वे की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी गई है। एजेंसी द्वारा आवेदन करने के बाद से लेकर मकान का निर्माण पूरा होने तक की निगरानी की जाती है। कागजों में दी गईं जानकारियों को भी धरातल पर परखा जाता है। एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर ही लाभार्थी के बैंक खाते में अनुदान की राशि डूडा द्वारा हस्तांतरित की जाती है। बावजूद, अभी हाल ही में बाइस मामलों में गड़बड़ी पकड़ी गई है। ये सभी वे लोग थे, जिन्हें अपात्र होने के बाद भी योजना के तहत अनुदान राशि मिल गई थी। गड़बड़झाला सामने आने के बाद सभी से अनुदानित राशि वापस ले ली गई। लेकिन, अब तक गड़बड़ी के पीछे जवाबदेही तय नहीं हो पाई है। और तो और इसकी तह में कोई जाना नहीं चाह रहा है।
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जानकारों का कहना है कि कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने गलत तरीके से अनुदान राशि हासिल कर ली है। कई लोगों के पक्के मकान हैं, आय भी मानक से ज्यादा है, लेकिन उन्होंने साठगांठ कर अनुदान राशि हासिल कर ली।
इस मामले में डूडा की परियोजना अधिकारी संगीता सिंह ने कहा कि यदि गड़बड़ी में एजेंसी की लिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि योजना सरकार द्वारा नि:शुल्क चलाई जा रही है। किसी व्यक्ति द्वारा रुपयों की मांग की जाती है जो तुरंत ही अवगत कराएं, कार्रवाई होगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत जिले में 20,973 लोगों के आवेदनों को स्वीकृत किया गया था। इसमें से 1,056 को प्रथम किस्त पचास हजार रुपये, 7,052 को दूसरी किस्त के रूप में डेढ़ लाख रुपये व 1,774 लाभार्थियों को अंतिम किस्त के रूप में पचास हजार रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
चालीस शिकायतें मिलें, बाइस मामले पकड़े
नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को गलत तथ्यों के आधार पर अनुदान राशि हथियाने की चालीस शिकायतें प्राप्त हुईं। इसके आधार पर विभाग की ओर से जांच शुरू कर दी गई। इसमें 22 मामले में गड़बड़ी पकड़ी गई है। कुछ लोगों ने आय अधिक होने के बाद भी अनुदान हासिल कर लिया, तो किसी के पास पहले से मकान होने के बाद भी अनुदान ले लिया। इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। इन सभी से अनुदान राशि वापस ले ली गई है। अन्य शिकायतों की जांच अभी जारी है।
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यह है योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की आय तीन लाख रुपये सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसका खुद का पक्का मकान भी नहीं होना चाहिए। योजना के तहत सरकार की ओर से मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है। एक लाख तैंतीस हजार रुपये लाभार्थी को स्वयं खर्च करने का नियम है। लाभार्थी को मकान निर्माण के लिए पचास हजार रुपये, मकान का फाउंडेशन होने पर डेढ़ लाख रुपये व मकान का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर अंतिम किस्त पचास हजार रुपये के रूप में अदा की जाती है।
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