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Jhansi News: झांसी के बाल वैज्ञानिक का आविष्कार, बम निष्क्रिय करने में बनेगा मददगार

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। कोरोना काल के दौरान लगे लॉकडाउन में एक बाल वैज्ञानिक की सोच ने ऐसा आविष्कार किया है, जो देश की सुरक्षा में मददगार बन सकता है। केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक के 12वीं के छात्र योगेश कुशवाहा ने ईएमपी ड्रोन विकसित किया है। इस ड्रोन की खासियत है कि यह किसी भी बम को बिना छुए निष्क्रिय कर सकता है। छात्र के इस प्रोजेक्ट को दिल्ली के भारत मंडपम में लगी विज्ञान प्रदर्शनी में स्थान मिला है। सोमवार को भारत मंडपम में हाेने वाले परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्र योगेश के प्रोजेक्ट का अवलोकन करेंगे। साथ ही प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी लेंगे।
छात्र योगेश कुशवाहा बताते हैं कि उनकी बचपन से ही विज्ञान में रुचि रही है। उनके स्कूल (केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक) में वर्ष 2017 में अटल टिकरिंग लैब खुली थी। यहां पर पूरे विद्यालय के बच्चों को तरह-तरह के प्रयोग सिखाए जाते थे। उन्होंने अपनी शिक्षिका रसायन विज्ञान की प्रवक्ता रंजना उपाध्याय के नेतृत्व में भी लैब में कई प्रोजेक्ट बनाने शुरू किए। साल 2019 में कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन लगा, तो स्कूल बंद हो गया। इस दौरान उनके मन में विचार आया कि ऐसा ड्रोन विकसित किया जाए, जो देश की सुरक्षा में मदद कर सके। शिक्षिका रंजना उपाध्याय से बात की तो उन्होंने ईएमपी (इलेक्ट्रो मैग्नेटिक पल्स) ड्रोन बनाने की बात कही। शिक्षिका के सहयोग से उन्होंने एक साल में ड्रोन तैयार कर लिया। ईएमपी तकनीक की खासियत है कि यह चुंबकीय ऊर्जा के जरिये संचार को बाधित कर सकता है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है। शिक्षिका रंजना उपाध्याय बताती हैं कि ड्रोन की मदद से बम को किसी भी फ्रीक्वेंसी पर निष्क्रिय किया जा सकता है। प्रोजेक्ट को जिला और प्रदेश स्तर पर भी पुरस्कार मिल चुका है। अब केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से प्रोजेक्ट को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के तहत भारत मंडपम में लगी विज्ञान प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया। सोमवार को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्र से प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी लेंगे।
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स्टार्टअप शुरू करने की तैयारी : योगेश
छात्र योगेश बताते हैं कि उनके ड्रोन प्रोजेक्ट को देश की कई कंपनियों ने पसंद किया है और पेटेंट कराने के लिए कहा है। मगर वे खुद का स्टार्टअप शुरू कर ड्रोन बनाना चाहते हैं। इसके लिए तैयारी चल रही है। शहर के हंसारी निवासी योगेश के पिता रामप्रकाश कुशवाहा सेना से सेवानिवृत्त हैं। इन दिनों बैंक ऑफ बड़ौदा झांसी शाखा में कार्यरत हैं। वहीं मां उर्मिला कुशवाहा गृहिणी हैं। योगेश बताते हैं कि प्रोजेक्ट के लिए बड़े भाई अभिषेक कुशवाहा और अखिलेश कुशवाहा ने भी मदद की।
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नासा के लिए डिजाइन कर चुके रोवर
योगेश कुशवाहा नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के लिए रोवर भी डिजाइन कर चुके हैं। पिछले साल टीम नासा द्वारा आयोजित हृयूमन एक्सप्लोरेशन रोवर चैलेंज में उनका चयन किया गया था। उन्होंने नासा की एस्ट्रोवीर टीम में शामिल होकर रोवर का मॉडल बनाया था। रोवर एक तरह का यंत्र होता है जो अंतरिक्ष और ग्रहों पर जाकर वहां खोज करता है। योगेश की सफलता पर केंद्रीय विद्यालय एक के प्रधानाचार्य नरेश बाबू अग्रवाल और उप प्रधानाचार्य ए अग्रवाल ने खुशी जताई है।
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