संभागीय परिवहन विभाग ने 7.5 टन क्षमता वाले कॉमर्शियल वाहनाें (टैक्सी, मिनी बस, छोटे मालवाहक) के लिए एकमुश्त टैक्स देने की व्यवस्था लागू कर दी है। यह आदेश नए वाहनों के साथ पुराने वाहनों पर भी लागू होने से लोग परेशान हैं। पुराने वाहन स्वामियों के एकमुश्त टैक्स जमा न कराने पर उनकी फिटनेस नहीं हो पा रही है। बिना फिटनेस के कॉमर्शियल वाहन का उपयोग करने पर भारी भरकम जुर्माने का भय सता रहा है। नई व्यवस्था से प्रभावित कई वाहन स्वामी संभागीय परिवहन कार्यालय में शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अफसरों ने शासन के आदेश का हवाला देते हुए राहत देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। दिगारा निवासी राकेश यादव का आरोप है कि उन्होंने जेसीबी खरीदी थी। एकमुश्त टैक्स जमा न कराने पर फिटनेस नहीं की गई। जबकि उसके व्यापार का एक मात्र यही साधन है।
शासन ने एक फरवरी से 7.5 टन क्षमता के सभी कॉमर्शियल वाहनों पर एकमुश्त टैक्स जमा कराने का आदेश दिया है। इसमें नए व पुराने सभी वाहन शामिल हैं। एकमुश्त टैक्स जमा न कराने पर ऐसे वाहनों की फिटनेस नहीं की जाएगी।
सुजीत सिंह, एआरटीओ
एमपी व यूपी के आदेश में अंतर
दिगारा के राकेश यादव का कहना है कि मध्य प्रदेश से उन्होंने जेसीबी का पंजीयन कराया था। जहां हर साल फिटनेस का कोई प्रावधान नहीं है। वहां एकमुश्त टैक्स जमा कराने जैसा आदेश नहीं है। अफसरों ने भी माना कि एमपी व यूपी के आदेश में भिन्नता है। वहां जेसीबी कॉमर्शियल में पंजीकृत नहीं होती है।