बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह वर्ष 1976 में नंदनपुरा में किराये की इमारत में आयोजित किया गया था। इसमें तत्कालीन राज्यपाल एम. चेना रेड्डी और केंद्र सरकार के शिक्षा, समाज कल्याण एवं संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. नुरूल हसन भाग लेनें आए। राज्यपाल ने स्वतंत्रता सेनानी डॉ. भगवान दास माहौर को डी.लिट और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. रघुनाथ विनायक धुलेकर को डॉक्टरेट ऑफ लॉ की उपाधि प्रदान की थी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय मंगलवार को अपनी स्थापना के 50वें वर्ष में प्रवेश करेगा। किराये के एक कमरे से शुरू हुआ विवि वर्तमान में 185 एकड़ में फैल चुका है। बीयू के संकायाध्यक प्रो. मुन्ना तिवारी बताते हैं कि विवि के 50 वर्ष पूरे करने का सफरनामा तैयार करने के लिए जब पन्नों को पलटा गया तो काफी उत्साहित करने वाली जानकारियां मिली है, जिनको संकलित किया गया है।
185 एकड़ जमीन तक फैला विश्वविद्यालय
बुंदेलखंड महाविद्यालय में सन 1975 में एक कमरा किराये पर लेकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। जब कमरा छोटा पड़ने लगा तो तत्कालीन कुलपति प्रो. वाहिद यू मलिक ने नंदनपुरा में एफसीआई गोदाम के पास इमारत को किराये पर लिया। इसके बांद वर्ष 1976 में नंदनपुरा में विवि शिफ्ट कर दिया।
चूंकि विवि को एक वर्ष पूरा हो गया था, इसलिए दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। वर्ष 1986 तक विवि से कई महाविद्यालय जुड़ने लगे और इसका तेजी से विस्तार होने लगा। इसके बाद विवि प्रशासन ने कानपुर मार्ग पर 185 एकड़ जमीन ली और विवि को यहां शिफ्ट किया गया।