प्रशासन ने 144 गांवों में सर्वे कराया था। 50 प्रतिशत से अधिक धान की फसल में नुकसान मिला। एडीएम वित्त एवं राजस्व वरुण पांडेय ने बताया कि सर्वे के बाद 12 करोड़ की मांग भेजी है। मंगलवार को फिर बारिश होने के बाद दोबारा सर्वे कराया जाएगा।
चक्रवाती तूफान मोंथा के बाद बारिश से धान की फसल को नुकसान हुआ था। प्रशासन ने टीम से प्लाट-टू-प्लाट सर्वे कराया था। नुकसान का आकलन करने के बाद 12 करोड़ की मांग शासन को भेज दी थी। लेकिन, मंगलवार को दोबारा हुई बारिश से फिर से धान की फसल में नुकसान की आशंका को लेकर प्रशासन एक बार फिर से सर्वे कराएगा।
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खरीफ सीजन में लगातार बारिश से जहां 65 से 100 प्रतिशत फसलों को नुकसान हुआ था, वहीं धान की फसल को फायदा हुआ था। यही कारण है कि इस साल धान का रकबा 92,000 हेक्टेयर तक पहुंच गया था। लेकिन, मोंथा के कारण धान की खड़ी फसल खेतों में बिछ गई थी तो कटी फसल डूब गई थी। इससे किसानों को नुकसान हुआ था। प्रशासन ने 144 गांवों में सर्वे कराया था। 50 प्रतिशत से अधिक धान की फसल में नुकसान मिला। एडीएम वित्त एवं राजस्व वरुण पांडेय ने बताया कि सर्वे के बाद 12 करोड़ की मांग भेजी है। मंगलवार को फिर बारिश होने के बाद दोबारा सर्वे कराया जाएगा।