विवाह के बाद इकलौते बेटे ने मां-बाप का भोजन-पानी बंद कर दिया। दाने-दाने के लिए मोहताज होने पर मां सीमा ने पारिवारिक न्यायालय में भरण पोषण का वाद दायर किया था।
बचपन से पिता ने अपना पेट काटकर जिस बेटे को पाला, उसी ने माता-पिता को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया। बुजुर्ग दंपती ने न्यायालय में वाद दायर किया। मामला मध्यस्थता केंद्र में गया। दोनों पक्ष की काउंसलिंग के बाद न्यायालय ने बेटे को अपनी कमाई का 50 प्रतिशत हिस्सा भरण पोषण के लिए मां-बाप को देने का फरमान सुनाया।
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शहर क्षेत्र के बंगलाघाट के रहने वाले बुजुर्ग गंगाराम निजी काम करते थे। उम्र ज्यादा होने पर काम छोड़ दिया था। उन्होंने दो बेटियों और एक बेटे का विवाह कर दिया। विवाह के बाद इकलौते बेटे ने मां-बाप का भोजन-पानी बंद कर दिया। दाने-दाने के लिए मोहताज होने पर मां सीमा ने पारिवारिक न्यायालय में भरण पोषण का वाद दायर किया। अब कोर्ट ने बेटे विक्की को अपनी कमाई का 50 प्रतिशत हिस्सा मां-बाप को देने का फैसला सुनाया। बेटा विक्की प्राइवेट काम कर 12,000 रुपये महीना कमाता है। इसलिए उसे अपने माता-पिता को 6000 रुपये प्रति माह देना होगा।