थानों में फरियादियों की सुनवाई नहीं होने पर पीड़ित को मजबूरन आला अफसरों से लेकर कोर्ट तक का सहारा लेना पड़ता है। इसके बाद उनके मामले पंजीकृत हो पाते हैं, जो पीड़ित यहां तक नहीं पहुंच पाते, उनको न्याय भी नहीं मिल पाता। तकरीबन हर थाने में प्रार्थना पत्रों के ढेर लगे हैं, लेकिन उनके आधार पर पुलिस केस दर्ज करने को राजी नहीं होती। हालत यह है कि मारपीट जैसे मामूली विवाद भी थाने से निपट नहीं पा रहे हैं।
सुबह दस बजे से पुलिस थानों में रोजाना जनसुनवाई होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर फरियादियों को इसका बहुत अधिक फायदा नहीं होता। नवाबाद, सीपरी बाजार, प्रेमनगर, कोतवाली, उल्दन समेत तकरीबन हर थाने में रोजाना औसततन 15-20 शिकायती पत्र पहुंचते हैं लेकिन, पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक किसी थाने में एफआईआर दर्ज करने का औसत रोजाना दो का भी नहीं है। यहां दर्ज होने वाले अधिकांश मामले भी वरिष्ठ अफसर की दखल पर दर्ज होते हैं। थानों में सुनवाई न होने से एसएसपी एवं आईजी कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में पीड़ित पहुंचते हैं। एसएसपी कार्यालय में ही रोजाना औसतन 50-100 शिकायती पत्र पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश थाने से मायूस होकर पहुंचे लोग होते हैं।
तीन बार पुलिस ने कराया मेेडिकल, फिर भी चक्कर काट रहा फरियादी
प्रेमनगर थाने का हाल सबसे अजीब है। नगरा के हीरापुरा मोहल्ला निवासी राजेश साहू के मुताबिक 20 सितंबर को एक रेलकर्मी ने उसे स्कूटी से टक्कर मारी। इसके बाद लात-घूंसों से जमकर पीटा और गला तक दबाया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। राजेश ने उसी रात प्रेमनगर थाने में तहरीर दी। इसके बाद पुलिया नंबर नौ स्थित पुलिस चौकी से तीन बार मेडिकल कराया जा चुका हैं, लेकिन अब तक उसकी तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। अब पुलिस पीड़ित से ही अपने परिजनों को भी थाने लेकर आने का भी दबाव बना रही है।
शिकायत दर्ज करने में उल्दन सबसे फिसड्डी
सितंबर महीने में अब तक केस दर्ज करने के मामले में उल्दन सबसे फिसड्डी थाना साबित हुआ है। वहां सबसे कम 18 मामले दर्ज हुए। इनमें भी पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से दर्ज कराए गए आठ मामले शामिल हैं। यानी आम लोगों के महज 10 मामले ही पूरे महीने में दर्ज किए जा सके।
सितंबर में 27 तारीख तक किस थाने में कितने मामले दर्ज
नवाबाद 50
प्रेमनगर 27
सीपरी बाजार 34
कोतवाली 22
रक्सा 17
बड़ागांव 13
बबीना 23
उल्दन 10
थानों की मॉनीटरिंग बढ़ाई है : एसएसपी
थानों की मॉनीटरिंग बढ़ाई गई है। थाने स्तर पर ही शिकायतों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। सभी थाना प्रभारियों को भी इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इनमें जल्द ही सुधार भी नजर आएगा। रोजाना दस बजे से सभी थानों में जनसुनवाई की ऑनलाइन निगरानी भी होती है।
विकास कुमार, एसएसपी
थानों में सुनवाई नहीं होने की वानगी
केस 1 : मसीहागंज निवासी सुमन लता के घर में 20 सितंबर की रात करीब 10:15 बजे पड़ोस में रहने वाला व्यक्ति घुस आया। उसको पीटकर घायल कर दिया। जान से मार देने की धमकी दी। सुमन की सूचना पर डायल-112 भी पहुंची। सुमन ने थाने जाकर शिकायत की, लेकिन थाने से उसे बैरंग लौटा दिया गया। परेशान होकर सुमन ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई। 23 सितंबर को एसएसपी के दखल पर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।
केस 2 : थाना प्रेमनगर निवासी बलराम प्रजापति के मुताबिक उनकी पुत्री को शादी के बाद 19 सितंबर को ससुराल से निकाल दिया गया। पीड़ित पक्ष ने प्रेमनगर थाने में शिकायत की, लेकिन थाना स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई। परेशान होकर परिजनों ने एसएसपी और आईजी कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई। अफसरों के दखल पर 25 सितंबर को आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
केस 3 : उल्दन थाना क्षेत्र के राजगिर मोहल्ला निवासी संतोष कुमार की पत्नी और भाभी को 30 जुलाई को जमीन के विवाद में परिजनों ने पीटकर घायल कर दिया। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गईं। संतोष ने पुलिस को सूचना दी लेकिन, घायलों का मेडिकल चार दिन बाद 4 अगस्त को कराया गया। संतोष के मुताबिक देरी से मेडिकल होने के कारण कई चोटों के निशान मामूली दर्ज हुए। 5 अगस्त को पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।
मारपीट की घटना का वीडियो...