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Jhansi: लक्ष्मी तालाब प्रकरण में एनजीटी सख्त, संयुक्त समिति गठित कर दो महीने में जांच रिपोर्ट साैंपने के आदेश

Thu, 15 Jan 2026 07:45 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि लक्ष्मी तालाब को बर्बाद कर करीब 54 करोड़ रुपये का बंदरबांट किया गया है। निगम की तरफ से वर्षों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाला अशोधित सीवेज, पशु अवशेष तथा अपशिष्ट जल सीधे तालाब में प्रवाहित किया गया।
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लक्ष्मी तालाब प्रकरण में एनजीटी की सख्ती
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विस्तार
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने झांसी स्थित लक्ष्मी तालाब से जुड़े अतिक्रमण, प्रदूषण एवं पक्के निर्माण के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संयुक्त जांच समिति गठन कर दी है। समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), सर्वे ऑफ इंडिया और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ/सीसी) लखनऊ के क्षेत्रीय कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी (संयुक्त सचिव से कम पद का नहीं) शामिल होंगे। एमओईएफ/सीसी के अधिकारी को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति को दो महीने में आरोपों की जांच कर स्थिति की रिपोर्ट एनजीटी को साैंपनी है।
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एनजीटी के प्रधान न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव के आदेश के मुताबिक संयुक्त समिति स्थलीय निरीक्षण कर पुराने राजस्व अभिलेखों से लक्ष्मी ताल के मूल क्षेत्र एवं सीमाओं का सत्यापन करेगी। समिति यह भी निर्धारित करेगी कि ताल का कितना क्षेत्र अतिक्रमित किया गया है। ताल के जलग्रहण/बफर क्षेत्र में किए गए निर्माण कार्यों की स्थिति का भी आकलन करेगी। साथ ही यह भी पता लगाएगी कि ऐसे निर्माण एवं अतिक्रमण के लिए कौन से व्यक्ति या प्राधिकरण जिम्मेदार हैं। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, झांसी इस कार्य में संयुक्त समिति को पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया दो माह की अवधि के भीतर पूर्ण की जाएगी। उसके बाद स्थिति रिपोर्ट तत्काल अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। सुनवाई के दाैरान याचिकाकर्ता भानू सहाय एवं नरेंद्र कुशवाहा ने साक्ष्यों को रखते हुए आरोप लगाया कि नगर निगम ने भवन एवं निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न अपशिष्ट को तालाब में पहले से जमे कीचड़ में डालकर उसमें मिला दिया और तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को अवैध रूप से भर दिया। उसके बाद उस पर स्थायी कंक्रीट निर्माण कर दिए। ऐसा करना पर्यावरण कानूनों, जल संरक्षण के सिद्धांतों तथा विधिक मानकों का गंभीर उल्लंघन है।

यह भी कहा गया कि नगर निगम की तरफ से वर्षों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों से निकलने वाला अशोधित सीवेज, पशु अवशेष तथा अपशिष्ट जल सीधे तालाब में प्रवाहित किया गया। इससे तालाब की प्राकृतिक संरचना और पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर क्षति पहुंची है। इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए एनजीटी ने कहा कि यदि ये तथ्य सही सिद्ध होते हैं तो यह प्रमुख सचिव, नगरीय विकास द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुपालन में विफलता को दर्शाता है। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।
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याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि लक्ष्मी तालाब को बर्बाद कर करीब 54 करोड़ रुपये का बंदरबांट किया गया है। यह धनराशि तालाब के संरक्षण, सुंदरीकरण एवं विकास के नाम पर खर्च दिखाई गई जबकि हकीकत में तालाब की प्राकृतिक स्थिति को ही नष्ट कर दिया गया। अवमाननापूर्ण कृत्यों के तहत लक्ष्मी तालाब के कुल 33.068 हेक्टेयर के जलग्रहण क्षेत्र में से लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र को तालाब की प्राकृतिक परिधि से हटाकर कंक्रीट से भर दिया गया है, जिससे उसकी प्राकृतिक संरचना, उसके जलग्रहण ढांचे तथा पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर क्षति पहुंची है।
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