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झांसी : उत्कल एक्सप्रेस से ननों को उतारने के मामले में दो हिंदूवादी नेता गिरफ्तार

Fri, 02 Apr 2021 12:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

  • दिल्ली से आदेश आते ही एक्शन में जीआरपी
  • सीओ बोले, एफआईआर कर भेजा जाएगा जेल
  • जांच रिपोर्ट पूरी कर भेजी जा चुकी है लखनऊ
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एक्शन में जीआरपी... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्कल एक्सप्रेस से ननों को उतारे जाने के मामले में दिल्ली से कार्रवाई का आदेश आते ही जीआरपी ने इस मामले में दो हिंदूवादी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में जांच रिपोर्ट पूरी कर लखनऊ भेजी जा चुकी है।

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19 मार्च को उत्कल एक्सप्रेस से उतारी गई नन व किशोरियों के मामले में खूब हल्ला मचा। इस मामले में लीविया थोमस, हेमलता (ईसाई धर्म की नन), श्वेता और बीतरंग के बयान मोबाइल से दर्ज होने के बाद प्रभारी एसपी सौमित्र यादव ने जांच पूरी कर रिपोर्ट लखनऊ सौप दी है। 

जांच पूरी होने के बाद गुरुवार को दिल्ली से आदेश आते ही जीआरपी कार्रवाई के लिए जुट गई। जीआरपी प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह को सूचना मिलने के बाद गुरुवार रात स्टेशन के पास से हिंदूवादी नेता अंचल व पुरुकेश अमरया को गिरफ्तार कर लिया गया। सीओ नईम मंसूरी ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अब एफआईआर कर दोनों को जेल भेजा जाएगा।
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नौ दिन, 20 लोगों के बयान, दबिश और सीधे गिरफ्तारी
उत्कल एक्सप्रेस से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं की सूचना पर ईसाई धर्म की दो नन और दो किशोरियों को उतारने के मामले ने उड़ीसा से लेकर दिल्ली व लखनऊ तक हल्ला मचा रहा।

24 मार्च से शुरू हुई जांच के दौरान अधिकारियों समेत बीस पुलिसवालों के बयान हुए। बृहस्पतिवार रात गृह मंत्रालय से कार्रवाई का आदेश आने के बाद जीआरपी ने आनन-फानन दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

धर्मांतरण की सूचना के बाद उत्कल एक्सप्रेस से नन व किशोरियों को जीआरपी लाया गया था। जांच दौरान नन व किशोरियों के सुबूत दिखाने के बाद चारों को छोड़ दिया गया था। राउरकेला पहुंचने के बाद पूरी जानकारी हुई थी। केरल के मुख्यमंत्री ने गृहमंत्री अमित शाह के सामने पूरा मामला रखा था। अमित शाह के जांच का आदेश मिलने के बाद खलबली मच गई थी। गृह मंत्रालय ने पूरे मामले में जानकारी मांगी थी।

19 मार्च को हुई घटना के बाद पांच दिन बाद 24 मार्च को लखनऊ के प्रभारी एसपी सौमित्र यादव को पूरे प्रकरण की जांच के लिए झांसी भेजा गया। एसपी ने जीआरपी सीओ, जीआरपी इंस्पेक्टर, चार जीआरपी सिपाही, चार आरपीएफ कर्मी, चारों नन व किशोरियों समेत बीस लोगों के बयान दर्ज किए गए। ननों को जांच के लिए झांसी बुलाया गया था, लेकिन चारों ने झांसी आने से मना कर दिया था। इसके बाद मोबाइल से ही व्हाट्सएप के जरिए चारों के बयान दर्ज किए गए थे।

जीआरपी के साथ-साथ रेलवे व जांच एजेंसियां भी अपने स्तर से जांच में जुट गई थीं। गृह मंत्रालय से लगातार इनपुट लेने के चलते सभी पर प्रेशर बढ़ गया था। एसपी ने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ भेज दी थी। लखनऊ से जांच रिपोर्ट सीधे गृह मंत्रालय भेजी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बृहस्पतिवार रात कार्रवाई का आदेश आते ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

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