झांसी ने लगातार 12वें साल भी औसत बारिश का आंकड़ा नहीं छुआ है। अंतिम बार वर्ष 2013 में औसत से ज्यादा बारिश झांसी में हुई थी। उसके बाद से झांसी अच्छी बारिश के लिए तरसता रहा।
बुंदेलखंड से अब मानसून की विदाई हो गई है। इस मानसूनी सीजन में 690 मिलीमीटर पानी गिरा है। हवाओं के दबाव के कारण एक हफ्ते ज्यादा समय तक मानसून सक्रिय रहा है।
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जनपद में मानसूनी सीजन एक जून से 30 सितंबर तक होता है। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार एक जून से सात अक्तूबर तक झांसी की औसत बारिश 738.8 मिलीमीटर है। इसके सापेक्ष जनपद में 48.4 मिलीमीटर पानी कम गिरा है। कृषि विज्ञान केंद्र भरारी के मौसम वैज्ञानिक आदित्य कुमार सिंह का कहना है कि सदर तहसील में सबसे ज्यादा 1300 लगभग मिलीमीटर पानी गिरा है। बताया गया कि अब ओडिशा में चक्रवात सक्रिय हो गया है। इसका असर तीन-चार दिन बाद देखने को मिल सकता है। मगर मानसून अब बुंदेलखंड से लौट गया है।
लगातार 12वें साल भी औसत बारिश का आंकड़ा नहीं छुआ
झांसी ने लगातार 12वें साल भी औसत बारिश का आंकड़ा नहीं छुआ है। अंतिम बार वर्ष 2013 में औसत से ज्यादा बारिश झांसी में हुई थी। उसके बाद से झांसी अच्छी बारिश के लिए तरसता रहा। पिछले 11 सालाें में तीन बार तो 500 मिलीमीटर पानी तक जनपद में नहीं गिरा। अधिकतर 600 से 700 मिलीमीटर के बीच में ही वर्षा होती रही। सिर्फ एक बार ही झांसी में औसत वर्षा 700 मिलीमीटर का आंकड़ा छू सकी। झांसी में जून और जुलाई में तो अच्छी बारिश हुई। ऐसे लगा रहा था कि जिला औसत बारिश का आंकड़ा पार कर लेगा। मगर अगस्त से मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई, जो सितंबर में भी जारी रही।