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सरकारी फेर में फंसा तीसरी रेल लाइन का निर्माण

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झांसी। तीसरी रेल लाइन के निर्माण में दतिया से सोनागिर के बीच आठ हेक्टेयर जमीन वन विभाग के दायरे में आ रही है। रेलवे ने वन विभाग से उक्त क्षेत्र के पेड़ काटने, चट्टानें तोड़ने के लिए अनुमति मांगी है। मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव के पास फाइल पहुंच गई है, लेकिन कांग्रेस सरकार गिरने से फाइल लटक कर रह गई है।
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झांसी से मथुरा के बीच 273 किलोमीटर में तीसरी रेल लाइन डालने की मंजूरी मिली है। इस काम को झांसी से धौलपुर और धौलपुर से मथुरा के बीच बांटा गया है। इसमें रेल विकास निगम लिमिटेड ने झांसी से आंतरी के बीच नोएडा की पीटीआई, आंतरी से धौलपुर के बीच गुड़गांव की जीआर इंफ्रा और धौलपुर से मथुरा के बीच दिल्ली की एसटीएस कंपनी को काम सौंपा गया है। झांसी से मथुरा के बीच नौ स्टील के ब्रिज (पुल) का निर्माण होगा, जिसको कोलकाता की जीपीटी इंफ्रा कंपनी बनाएगी। झांसी से धौलपुर के बीच 160 किलोमीटर में अलग- अलग जगह समतलीकरण का काम तेजी से चल रहा है। मगर, दतिया व सोनागिर स्टेशन के बीच कई हिस्सों में जमीन समतलीकरण का काम मध्य प्रदेश सरकार की अनुमति न मिलने के कारण अटका पड़ा है।
दरअसल, उक्त दोनों स्टेशनों के बीच पड़ने वाली आठ हेक्टेयर जमीन में पेड़ व चट्टानें हैं, जिनको वन विभाग की अनुमित से काटा व तोड़ा नहीं जा सकता है। वन विभाग ने मध्य प्रदेश सरकार से अनुमति मांगी है। मगर पिछले डेढ़ महीने से मध्य प्रदेश सरकार में चल रही उठा पटक और फिर सरकार के गिर जाने के कारण फाइल लटक कर रह गई है। इस कारण उक्त दूरी के बीच काम नहीं हो पा रहा है।
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