झांसी-मानिकपुर डबल ट्रैक योजना लटकी
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मानिकपुर डबल ट्रैक को बनाने का काम इस साल भी शुरू नहीं हो सकेगा। इस बजट में भी फंड की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
झांसी- मानिकपुर सिंगल ट्रैक पर लगातार ट्रेनों का भार बढ़ता जा रहा है। इस ट्रैक पर अप और डाउन की ट्रेनों को क्रास कराते समय एक गाड़ी नजदीक के स्टेशन पर रोकना पड़ता है, तब दूसरी गाड़ी आगे निकल पाती है। इससे ट्रैक पर दौड़ने वाली ट्रेनें अपना समय पालन नहीं बना पाती है। अक्सर ट्रेनें लेट हो जाती है।
इस समस्या के निदान के लिए पिछले रेल बजट में झांसी-मानिकपुर और खैरार-भीमसेन लाइन को डबल ट्रैक करने के लिए तीन हजार करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई थी। इस योजना में 411 किलोमीटर डबल ट्रैक बिछना है। डबल ट्रैक बनने पर इस मार्ग पर और ट्रेनें चलाने में भी सुगमता होगी। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी इस लाइन के लिए कोई फंड नहीं दिया गया। इस बजट में भी फंड की कोई व्यवस्था नहीं की गई। इससे उक्त महत्वाकांक्षी योजना इस साल भी काम शुरू होने की कोई उम्मीद नहीं है। इस संबंध में पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि फंड मिलने पर ही डबल ट्रैक पर काम शुरू हो सकेगा।
झांसी से पारीछा तक डबल ट्रैक तैयार
झांसी- कानपुर डबल ट्रैक का 21 किलोमीटर हिस्सा (झांसी से पारीछा तक ट्रैक) का काम लगभग पूरा कर लिया गया है। कुछ जगहों पर ज्वाइंट जोड़ने का काम ही बाकी है। पारीछा तक विद्युतीकरण भी हो चुका है। उम्मीद है कि मार्च से इस नए ट्रैक पर पारीछा तक ट्रेनें दौड़ने लगेगी। मालूम हो कि झांसी होकर हर रोज पारीछा थर्मल पावर हाउस कोयले से भरी मालगाड़ियां जाती हैं। अभी सिंगल लाइन होने के कारण मालगाड़ियों को निकालते समय अन्य ट्रेनों को रास्ते के स्टेशनों पर खड़ा करना पड़ता है। पारीछा तक डबल ट्रैक शुरू होने पर अन्य ट्रेनों का संचालन तेज हो जाएगा।