अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी के जिला कारागार में बन रहे खिलौने इन दिनों महाकुंभ में नजर आ रहे हैं। प्रयागराज मेला परिसर में अलग से लगाए गए स्टॉल पर इनकी बिक्री की जा रही है। यहां 15 बंदी इसका निर्माण कर रहे हैं। इसके एवज में उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
जिला कारागार में बंदियों को समय-समय पर व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि बाहर निकलकर बंदी अपना व्यवसाय कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। इसी कड़ी में 15 बंदियों को सॉफ्ट ट्वायज बनाने का एक महीने का प्रशिक्षण दिलाया गया था। इस काम में निपुण होने के बाद अब इन बंदियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। उनके लिए कच्चा माल, सिलाई मशीन आदि की व्यवस्था जेल प्रशासन की ओर से की गई है।
शुरुआत में जेल प्रशासन की ओर से महाकुंभ मेले में सॉफ्ट ट्वायज की पहली खेप भेजी गई थी, जो हाथों हाथ बिक गई। आनन-फानन अब 100 सॉफ्ट ट्वायज की दूसरी खेप तैयार कर भेजी जा रही है। जोरशोर से जुटे बंदी खिलौने तैयार करने में जुटे हुए हैं। जेल में चार अलग-अलग साइज के सॉफ्ट ट्वायज तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी कीमत 80, 165, 345 और 485 रुपये तय की गई है। इन्हें बनाने वाले बंदियों को प्रतिदिन 40 से 80 रुपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
खिलौने बनाने में बंदी पूरी तरह से निपुण हो चुके हैं। यही वजह है कि उनके बनाए हुए सॉफ्ट ट्वायज लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। जेल से बाहर निकलने पर बंदी इसे अपनी आजीविका का साधन भी बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। - विनोद कुमार, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
झांसी का ओडीओपी उत्पाद है सॉफ्ट ट्वायज
सॉफ्ट ट्वायज झांसी का एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) में साल 2018 से शामिल है। यहां तकरीबन डेढ़ सौ लोग इसका निर्माण करते हैं। यहां बने सॉफ्ट ट्वायज देश के कई हिस्सों में जाते हैं। महाकुंभ मेला क्षेत्र में प्रदेश के 20 जिलों के ओडीओपी उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें झांसी के सॉफ्ट ट्वायज भी शामिल हैं।