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Jhansi: स्कूली वाहनों की जांच शुरू, 15 अप्रैल तक चलेगा विशेष अभियान, पोर्टल पर दर्ज करना होगा पूरा विवरण

Sun, 05 Apr 2026 08:51 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क

सार

अब तक 56 स्कूलों के 85 वाहनों का पंजीकरण पोर्टल पर हो चुका है। शेष स्कूलों को भी ब्योरा जल्द अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
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आरटीओ, झांसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। जिले में 15 अप्रैल तक स्कूली वाहनों के विवरण दर्ज करवाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा और सुरक्षा उपकरणों की भी गहन जांच की जा रही है। अब तक 56 स्कूलों के 85 वाहनों का पंजीकरण पोर्टल पर हो चुका है। शेष स्कूलों को भी ब्योरा जल्द अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अभियान के दौरान सभी स्कूली वाहनों का विवरण यूपी इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल (यूपी-आईएसवीएमपी) पर दर्ज करना अनिवार्य है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान या बाद में यदि कोई स्कूली वाहन नियमों का उल्लंघन करता मिला, तो चालक और स्कूल प्रबंधन दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एआरटीओ (प्रवर्तन) सुजीत सिंह ने बताया कि स्कूली वाहनों में दुर्घटनाओं का बड़ा कारण उनकी खराब या अधूरी फिटनेस है। इसी को देखते हुए शासन ने इस पोर्टल के जरिए निगरानी और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की पहल की है। पोर्टल पर स्कूलों को अपने सभी वाहनों का पूरा ब्योरा दर्ज करना होगा, जिसमें वाहन का प्रकार, आयु, मॉडल, इंजन और चेसिस नंबर, स्वामी का विवरण, परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, जीपीएस ट्रैकिंग और सीसीटीवी कैमरों की जानकारी शामिल होगी।
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स्टांप पेपर पर देना होगा शपथ पत्र
विद्यालय प्रबंधन को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसमें यह प्रमाणित करना होगा कि सभी वाहनों के दस्तावेज वैध हैं और चालक निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं।

चालकों की जानकारी भी अनिवार्य
पोर्टल पर वाहन चालकों का पूरा विवरण देना होगा, जिसमें उनका नाम-पता, ड्राइविंग लाइसेंस, कम से कम पांच साल का अनुभव, पुलिस सत्यापन, स्वास्थ्य व नेत्र परीक्षण प्रमाणपत्र, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी शामिल हैं।

दो स्तर पर बनाई जाएंगी निगरानी समितियां
स्कूली वाहनों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी, जिसमें पुलिस व परिवहन विभाग समेत अन्य अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति साल में दो बार बैठक करेगी।इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में भी परिवहन सुरक्षा समिति बनाई जाएगी, जो साल में चार बार बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी।
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