मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में सोमवार से गैस्ट्रोस्कोपी (अपर एंडोस्कोपी) और कोलोनोस्कोपी (लोअर एंडोस्कोपी) शुरू हो गई। यह जांच करीब एक साल से बंद थी। इससे रोगियों को महंगे दामों पर निजी संस्थानों में जांच करानी पड़ रही थी।
सर्जरी विभाग के वार्ड संख्या तीन में करीब एक साल पहले एक रोगी की गैस्ट्रोस्कोपी जांच चल रही थी। जांच के दौरान उपकरण में लगे लेंस को रोगी ने चबाकर तोड़ दिया था। इस वजह से एंडोस्कोपी जांच बंद हो गई थी। मरीजों को निजी संस्थान में दो हजार रुपये खर्च करके यह जांच करानी पड़ रही थी।
सर्जरी विभागाध्यक्ष ने रोगियों की परेशानी से कॉलेज प्रशासन को अवगत कराया। इसके बाद जांच शुरू करने की दिशा में प्रयास किए गए। मेडिकल कॉलेज में यह जांच केवल 300 रुपये में हो रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार बनौरिया ने बताया कि सोमवार से जांच शुरू कर दी गई है। रविवार को यह जांच नहीं होगी।
जांच के दिनों का किया निर्धारण
डॉ. अलबेल सिंह यादव सोमवार, डॉ. संजय चौबे बुधवार और डॉ. आकाश गुप्ता शुक्रवार को गैस्ट्रोस्कोपी करेंगे। वहीं, डॉ. संजय चौबे मंगलवार, डॉ. अलबेल सिंह यादव बृहस्पतिवार और डॉ. आकाश गुप्ता शनिवार को कोलोनोस्कोपी करेंगे।
ये होती है एंडोस्कोपी
लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है। इसके सिरे पर लाइट और कैमरा होता है। कैमरे की मदद से ली गईं तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इसी प्रक्रिया को एंडोस्कोपी कहते हैं।
गैस्ट्रोस्कोपी
जिन्हें खाने में दिक्कत होती है। गले से लेकर सीने तक तेज जलन होती है। खाने के बाद पेट में तेज दर्द होता है। इन लोगों में अल्सर होने की अंदेशा होती है। इसकी पुष्टि के लिए यह जांच कराई जाती है। इसमें रोगी के मुंह से पाइप छोटी आंत तक जाती है और फोटोग्राफी करते हैं।
कोलोनोस्कोपी
इसमें बड़ी आंत और मलाशय के रास्ते की जांच की जाती है। इससे मल में खून आने, अस्पष्ट एनीमिया जैसी समस्याओं के कारणों का पता लगता है। यह जांच कोलन कैंसर की जांच में भी उपयोगी होती है।