उन्होंने बताया कि गिरोह ने सभी फर्म को रजिर्स्टड कराने के लिए एक तरीके से कागज बनवाए। सभी में दक्षिणाचंल विद्युत बोर्ड के विद्युत बिल समेत चाइनीज नाम के ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया गया लेकिन, सभी में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल हुआ था। गड़बड़ी की आशंका पर जब आईपी एड्रेस के जरिए पड़ताल हुई तब फर्जीवाड़ा उजागार हो गया।
जीएसटी अफसरों ने मुताबिक यह फर्जी फर्म इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने की खातिर बनाई गई थीं। इन सभी का पंजीकरण निरस्त करने के साथ इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
यह होता है आइटीसी
व्यापारी को माल खरीदने के बाद इस टैक्स चुकाना होता है। इसके बाद जब व्यापारी यह माल बेचता है तब उसे कुल कीमत पर टैक्स देना होता है। इस तरह पहले माल खरीदने के बाद जितना टैक्स उसने चुकाया होता है वह उसकी इनपुट टैक्स क्रेडिट हो जाती है। दूसरी बार में माल बेचने पर जितना टैक्स चुकाना होता है वह इनपुट टैक्स क्रेडिट से घटा दिया जाता है। यही राशि उसे टैक्स के तौर पर महकमे में जमा करनी होती है। खरीद रसीद न दिखाने के बाद फर्जी फर्म के माध्यम से कई चेन में माल बेचकर व्यापारी करोड़ों रुपये के टैक्स बचा लेते हैं।
पड़ताल करने पर फर्जी नाम-पते पर 19 शहरों में जीएसटी लाइसेंस लेने की बात मालूम चली है। फर्जीवाड़ा उजागर होने पर इन सभी फर्मों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए। इसके बारे में शासन को भी अवगत कराया गया है।
- भानु प्रकाश मिश्रा, अपर आयुक्त (ग्रेड वन)