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Jhansi: फरार चोर को सात साल की सजा, झांसी में पहली बार अभियुक्त की अनुपस्थिति में हुआ फैसला

Sat, 19 Sep 2026 11:48 AM IST
दीपक महाजन संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी

सार

एडीजे (प्रथम) की अदालत ने चोरी के मामले में बबीना निवासी संतोष को सात साल के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियुक्त वारदात के बाद से फरार है। 
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कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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फरार अभियुक्त के खिलाफ अदालत ने उसकी गैरहाजिरी में फैसला सुनाया है। एडीजे (प्रथम) आदित्य चतुर्वेदी की अदालत ने मेडिकल स्टोर में चोरी के मामले में बबीना निवासी संतोष ढीमर को सात साल के कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अभियुक्त वारदात के बाद से फरार है और मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुआ।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 सितंबर 2024 की रात संतोष ने बीकेडी चौराहे के पास स्थित ग्लोबल मेडिकल स्टोर की खिड़की काटकर चोरी की थी। दुकान से चांदी की दो मूर्तियां, दो मोबाइल फोन और 7,500 रुपये नकद चोरी किए गए थे। 14 सितंबर की सुबह दुकान मालिक आलोक कनकने ने खिड़की कटी देखी तो पुलिस को सूचना दी। नबावाद थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की और अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई की।

तीन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने अभियुक्त को संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया। धारा 305 के तहत पांच साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने, धारा 331(4) के तहत सात साल के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। धारा 317(2) में भी तीन साल के कारावास की सजा दी गई। अदालत ने सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया। इस कारण प्रभावी कारावास की अवधि सात साल होगी।
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फरार रहने के बावजूद आगे बढ़ी सुनवाई
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रविप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि अभियुक्त के फरार रहने के बावजूद कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाई गई। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर लिया गया। अभियुक्त के अदालत में पेश न होने के कारण मुकदमे की प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रही। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पहले फरार अभियुक्तों के मामलों में उनकी अनुपस्थिति के कारण सुनवाई लंबे समय तक प्रभावित होती थी। अब कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में आगे की कार्रवाई संभव है।

पहली बार ऐसा फैसला
अभियोजन पक्ष ने इसे झांसी जनपद में इस तरह का पहला फैसला बताया है, जिसमें अभियुक्त की अनुपस्थिति में उसके खिलाफ निर्णय सुनाया गया। संतोष घटना के बाद से फरार है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत सामग्री के आधार पर मामले का निर्णय किया।
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