डॉ. सुशील का कहना है कि कोविड महामारी के दौरान भी उन्होंने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए जाने की शिकायत तत्कालीन सीएमओ से की थी, लेकिन आरोप है कि उस समय मामला दबा दिया गया और आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
किसी डॉक्टर के नाम की मुहर के साथ अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया जाना गंभीर अनियमितता है। सीएमओ को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करने और उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. आरके सोनी, एडी हेल्थ
मामले की जानकारी देते डॉ. सुशील कुमार गुप्ता...
बीमा, छुट्टी, नौकरी आदि के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट हमेशा सरकारी या अधिकृत चिकित्सक से ही बनवाएं।
किसी दलाल या बिचौलिए के माध्यम से मेडिकल सर्टिफिकेट न बनवाएं।
फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का उपयोग करना या बनवाना अपराध है।