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तीन से छह महीने रहती एंटीबॉडी, प्लाज्मा दान करने में डरें नहीं

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झांसी। कोरोना संक्रमण के बाद एंटीबॉडी को लेकर अब तक ठोस शोध सामने नहीं आए हैं, फिर भी डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव हो चुके व्यक्ति में तीन से छह महीने तक एंटीबॉडी रहती है। ऐसे में प्लाज्मा दान करने में लोग कदम पीछे न खींचें। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 28वें और निगेटिव आने के 14वें दिन प्लाज्मा दान कर दो लोगों की जान बचा सकते हैं।
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कोरोना के गंभीर मरीजों की जान बचाने में प्लाज्मा थेरेपी काफी मददगार साबित हो रही है। कोरोना को मात देने वाले व्यक्ति का प्लाज्मा जब किसी मरीज को चढ़ाया जाता है तो उसके शरीर में भी संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बनने लगती है। यही एंटीबॉडी उसे संक्रमण से लड़ने की ताकत देती है और कुछ समय बाद मरीज स्वस्थ हो जाता है। मगर कोरोना के डर से लोग प्लाज्मा दान करने से पीछे हट रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मुरारीलाल आर्या ने बताया कि संक्रमित होने के बाद तीन से छह महीने तक मनुष्य के शरीर में एंटीबॉडी रहती है। ऐसे में दोबारा संक्रमण होने का खतरा नहीं रहता है। इसलिए दूसरों की जान बचाने को प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आएं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के 28वें कोई भी व्यक्ति प्लाज्मा दान कर सकता है। वहीं, यदि उसके बाद कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट है तो वह उसके 14वें दिन प्लाज्मा दे सकता है। एक बार प्लाज्मा दान करने पर दो लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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हैप्पी ने पेश की मिसाल, पांच माह में पांच बार दान किया प्लाज्मा
आठ लोगों की बचाई जान, कहा-इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। विंग्स संस्था के संरक्षक हैप्पी चावला ने कोरोना महामारी के दौर में समाज के सामने बड़ी मिसाल पेश की है। कोरोना संक्रमित होने के बाद पिछले पांच महीने में वे पांच बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। उनके दान किए हुए प्लाज्मा से आठ लोगों की जान बची है। उनका कहना है कि इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं होता है।
हैप्पी ने बताया कि वह चार नवंबर 2020 को कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। 11 नवंबर को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई। रिपोर्ट निगेटिव आने के 15वें दिन उन्हें जानकारी हुई कि उनके समान ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को प्लाज्मा की जरूरत है। बिना देरी किए वह प्लाज्मा दान करने पहुंच गए। इसके बाद से अब तक वह पांच बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। अंतिम बार उन्होंने आठ अप्रैल को प्लाज्मा दान किया था। हैप्पी ने बताया कि प्लाज्मा कहीं से बनाया नहीं जा सकता है, इसे सिर्फ दान किया जा सकता है। मनुष्य का जीवन बहुत अनमोल होता है और यदि हम किसी का जीवन बचाने में योगदान देते हैं तो बहुत पुण्य मिलता है। उन्हें खुशी है कि उनके दिए हुए प्लाज्मा से अब तक आठ लोगों की जान बच चुकी है। आगे भी यदि किसी व्यक्ति को प्लाज्मा की जरूरत पड़ेगी तो वे बेहिचक दान करने पहुंच जाएंगे। उन्होंने बताया कि वह 65 बार रक्तदान भी कर चुके हैं।
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