अतीक अहमद के बेटे अली के झांसी जेल के बैरक नंबर 6 में पहुंचने के बाद पुलिस के सामने चुनौती बढ़ गई है। जिन जेलों में अतीक परिवार के सदस्य बंद होते हैं, उनमें इनके गैंग आईएस-227 के गुर्गे भी छोटे-मोटे अपराध करके पहुंच जाते हैं।
नैनी सेंट्रल जेल में भी उसके गुर्गों का जमावड़ा हो गया था। ऐसे में आशंका जताई जा रही कि झांसी जेल में भी अतीक गैंग के गुर्गे आ पहुचेंगे। पुलिस के सामने इनकी शिनाख्त करने की चुनौती रहेगी। माफिया अतीक अहमद का बसपा शासनकाल से ही जेल से नाता रहा है। कई साल तक वह नैनी सेंट्रल जेल में बंद रहा। उस दौरान उसके गैंग के दर्जनों गुर्गे छोटे-मोटे अपराध करके नैनी जेल पहुंच जाते थे। इसके बाद जब अशरफ बरेली जेल में बंद रहा, तब वहां भी प्रयागराज के कई बदमाश चले गए। अपने गुर्गों की मदद से दोनों भाई जेल में भी अपना आतंक बनाकर रखते थे।
अतीक एवं अशरफ की हत्या के बाद अतीक का बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है जबकि मंझला अली नैनी जेल में बंद था। ये दोनों भी अतीक के ही रास्ते पर चल निकले हैं। इन दोनों के जेल में रहने के दौरान भी इनके गैंग के गुर्गें छोटे-मोटे अपराध करके जेल पहुंच जाते हैं। पुलिस ने पिछले दिनों उसके गैंग में सौ से अधिक बदमाशों को चिह्नित किया था। इस गिरोह में आबिद, फरहान, मल्ली, जुल्फिकार तोता जैसे शूटर शामिल हैं।
अतीक एवं अशरफ की मौत के बाद इस गैंग का हैंडलर अली को ही माना जाता है। ऐसे में आशंका जताई कि गैंग के गुर्गे अब जेल पहुंचने की कोशिश करेंगे। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार का कहना है कि सभी परिस्थितियों पर निगाह रखी जाएगी।