झांसी। दतावली मामले के राजनीतिक रंग पकड़ने के बाद आखिरकार पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। पहली गाज रक्सा थानेदार के ऊपर गिर चुकी। सीओ मोंठ भी छुट्टी पर चले गए। बताया जा रहा मामले को ठंडा करने के लिए उनको छुट्टी पर भेज दिया गया है। शासन भी पूरे मामले को न संभाल पाने से स्थानीय अफसरों से नाराज है। संकेत मिल रहे कि कार्रवाई की जद में पुलिस के आला अफसरों का आना तय है।
15 अप्रैल को मतदान के दौरान दतावली बूथ पर जमकर हंगामा हुआ था। यहां मतपेटिका लूटने के साथ उसे तोड़कर फेंक दिया गया, मतपत्र फाड़ दिए गए। इस मामले में पीठासीन अधिकारी एवं एसओ समथर ने एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब एसओजी टीम ने विधायक जवाहर लाल राजपूत के बस्ते पर दबिश देकर पंद्रह लोगों को उठा लिया। इनको पकड़कर एसओजी टीम रक्सा थाने पहुंची। आरोप है पुलिस ने इन लोगों के साथ जमकर मारपीट की। वहीं, विधायक का दावा है पकड़े गए लोगों में अधिकांश का उस घटना से कोई वास्ता नहीं। पुलिस ने बिना जांच पड़ताल के इन लोगों को पकड़ा बल्कि बुरी तरह मारा पीटा। मोंठ सीओ प्रदीप कुमार सिंह की भी शिकायत हुई।
उधर, विधायक के इस मामले हमलावर रवैया अपनाने के बाद शासन ने भी रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। बिना जांच-पड़ताल के कार्रवाई करने को लेकर एसओजी घिर गई लेकिन, पुलिस सूत्रों का कहना है कार्रवाई से पहले एसएसपी की भी मंजूरी ली गई। मारपीट करने की वजह से मामला बिगड़ गया था। शासन स्तर से फटकार खाने के बाद पुलिस अफसरों पर कार्रवाई का दबाव पड़ा। मजबूरी में भुक्तभोगियों के सामने परेड करानी पड़ी। भुक्तभोगियों ने एक समय में समथर थाने में तैनात रहे रक्सा एसओ सुधीर पवार को पहचान लिया। इसलिए सबसे पहले रक्सा एसओ निलंबित कर दिए गए। एक निलंबन के बाद बाद पूरे मामले के मिस हैडलिंग करने की वजह से आला अफसरों पर शिकंजा कस सकता है। सीओ मोंठ पर भी आरोप लगाए गए हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद सीओ मोंठ भी अवकाश पर भेज दिए गए। उनकी जगह सीओ ट्रैफिक अरूण कुमार चौरसिया को जिम्मा दिया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में चुनाव निपटने के बाद वरिष्ठ अधिकारी पर गाज गिर सकती है। इन वरिष्ठ अफसर पर जनपद मेें तैनात एक आईएएस अफसर के इशारे पर काम करने की चर्चा काफी तेजी से शहर में चल रही है।
इसकी जांच अभी चल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस बारे में कुछ बताया जा सकता है। जोगेंदर सिंह, डीआईजी
मेरी मांग सिर्फ एक एसओ को निलंबित करने की नहीं थी। इस मामले में न्याय होना चाहिए। जांच पूरी कराकर जल्द से जल्द निर्दोषों के साथ मारपीट करने के आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। जवाहर लाल राजपूत, विधायक, गरौठा