पहूज नदी में जमा कचरा व जलकुंभी।
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पहूज नदी के प्रदूषण, सीवेज प्रवाह और अतिक्रमण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने झांसी प्रशासन को प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को निर्देश दिया कि छह सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें कचरा प्रबंधन, नदी सफाई, सीवेज रोकने, गाद व अतिक्रमण हटाने और भविष्य की स्थायी योजना का विवरण देना होगा।
एनजीटी ने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग और डीएम को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश प्रधान पीठ नई दिल्ली में पारित किया गया। अब मामले की सुनवाई आगामी 13 मई को होगी। बताया गया कि सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि राज्य स्तर पर संज्ञान और जिला स्तर पर कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव द्वारा मामले का संज्ञान लेकर जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। जिला स्तर पर अनुपालन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एनजीटी के समक्ष आवेदक की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और फोटो साक्ष्यों में यह सामने आया है कि पहूज नदी क्षेत्र में लगातार ठोस अपशिष्ट, गंदे नालों का पानी और अतिक्रमण के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। इससे आसपास के क्षेत्रों में पीने के पानी, कृषि और जनस्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।
आवेदक भानु सहाय ने न्यायाधिकरण के समक्ष बताया कि झांसी नगर क्षेत्र से निकलने वाला ठोस अपशिष्ट एवं मल-मूत्र से दूषित नाले/सीवेज सीधे पहूज नदी में डाले जा रहे हैं, जिससे नदी में भारी मात्रा में कचरा, जलकुंभी आदि जमा होकर कई फीट मोटी गाद (स्लज) बन चुकी है। इससे पूरे क्षेत्र में भयंकर दुर्गंध और गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण फैल गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यही दूषित नदी जल दतिया गेट फिल्टर सिस्टम के जरिये नगर की पेयजल आपूर्ति से जोड़कर आम नागरिकों के घरों तक आपूर्ति की जा रही है।