गरियागांव में 500 बेड के आधुनिक मंडलीय अस्पताल के लिए साढ़े पांच हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर ली गई है। यह भूमि नगर निगम की है, जिसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित किया जाना है। जमीन नगर निगम सीमा में होने के कारण जिला प्रशासन ने निगम से सहमति मांगी है। सहमति मिलते ही भूमि के पुनर्ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
महानगर में करीब 60 साल पहले मिनर्वा चौराहे के पास जिला पुरुष और महिला अस्पताल स्थापित किए गए थे। उस समय आबादी कम होने के कारण सीमित क्षेत्र में ही दोनों अस्पतालों का निर्माण किया गया था। आबादी बढ़ने और चिकित्सा सेवाओं में आधुनिक तकनीक व उपकरण शामिल होने के बाद से दोनों अस्पतालों के विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी को देखते हुए 500 बेड के आधुनिक मंडलीय अस्पताल के निर्माण की योजना तैयार की गई।
15 अप्रैल की बैठक में उठा था मामला
500 बेड के मंडलीय अस्पताल के निर्माण का मामला 15 अप्रैल को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में उठा था। इसमें अस्पताल के निर्माण को सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद उपयुक्त जमीन की तलाश शुरू हुई। अब गरियागांव में साढ़े पांच हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर ली गई है।
नगर निगम को भेजा पत्र
चिह्नित भूमि नगर निगम की होने के कारण एडीएम प्रशासन की ओर से अपर नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जमीन हस्तांतरित करने के लिए निगम की सहमति मांगी गई है। एडीएम प्रशासन शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि नगर निगम की सहमति मिलते ही भूमि के पुनर्ग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
आयुष विंग से 100 बेड की कैंसर यूनिट तक
प्रस्तावित मंडलीय अस्पताल में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें आयुष विंग के साथ 100 बेड की कैंसर यूनिट होगी। इसके अलावा ओपीडी, आईपीडी, डायलिसिस यूनिट, आईसीयू, एचडीयू, सीटी स्कैन, ट्रॉमा सेंटर, डिजिटल एक्सरे, आधुनिक पैथोलॉजी, एसएनसीयू और एनआईसीयू जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। अस्पताल बनने के बाद झांसी समेत आसपास के जिलों के मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकेंगी।
इनका यह है कहना
एडीएम प्रशासन का पत्र प्राप्त हुआ है। मंडलीय अस्पताल के लिए जमीन देने का प्रस्ताव सदन के समक्ष रखा जाएगा। सदन की मंजूरी मिलते ही जमीन हस्तांतरण की स्वीकृति दे दी जाएगी।
- राहुल कुमार यादव, अपर नगर आयुक्त।