झांसी। जिला कारागार के सभी बंदी कोरोना को मात देने में सफल रहे। सभी ठीक होकर अपनी-अपनी बैरकों में भी लौट चुके हैं। हालांकि, इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के साथ-साथ उनके खानपान का पूरा ध्यान जेल प्रशासन की तरफ से रखा जा रहा है। जेल में आने वाले नए बंदी को जांच रिपोर्ट आने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।
पिछले दो माह के भीतर जिला कारागार में करीब तीन सौै से अधिक बंदी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसके बाद जिला कारागार में ही अस्पताल बनाकर बंदियों को क्वारंटीन किया गया था। जिनका समय-समय पर इलाज भी चला। बेहतर देखरेख के चलते सभी संक्रमित बंदी ठीक होते गए। पिछले पांच दिनों के भीतर सभी संक्रमित बंदी ठीक होकर अपनी-अपनी बैरकों में पहुंच चुके हैं। अब जेल में आने वाले कर्मचारियों को सैनिटाइज होने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। साथ ही जेल में आने वाले नए बंदियों की पहले जांच होती है। जांच रिपोर्ट आने से पहले सभी को हाफिज सिद्दीकी नेशनल इंटर कॉलेज में बनाई गई अस्थाई जेल में रखा जाता है।
काढ़ा बना मददगार
बंदियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए सुबह शाम काढ़ा (हर्बल चाय) व गर्म पानी दिया जा रहा है। यह काढ़ा आयुष विभाग के सुझाए गए उत्पादों से तैयार किया जा रहा है। इसमें तुलसी, जराकुश, काली मिर्च, अदरक, गुड़ व नीबू का प्रयोग किया जा रहा है। यह काढ़ा भी बंदियों के लिए खासा मददगार बना।
अलग बैरकों में रखे गए उम्रदराज बंदी
नई व्यवस्था के तहत जेल में बंद बंदियों में उम्रदराज बंदियों को अलग बैरकों में रखा गया है। ह्दय, किडनी, दमा, मधुमेह, रक्तचाप से ग्रसित बंदियों की चिकित्सकों की देखरेख में निगरानी की जा रही है। इनके इलाज में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए अलग से चिकित्सकों की टीम भी बनाई गई हैै।
जेल में अब एक भी बंदी कोरोना संक्रमित नहीं है। बंदियों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उनके खाने पीने से लेकर हर व्यवस्थाओं पर जेल प्रशासन की नजर है। राजीव शुक्ला, वरिष्ठ जेल अधीक्षक