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Jhansi News: गुमशुम जिंदगी में आईवीएफ से गूंजी किलकारी, गुटखा खाने से पुरुषों में बढ़ रही बांझपन की समस्या

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। जिले में ऐसे सैकड़ों दंपती हैं, जिनके चेहरे पर संतान होने की उम्मीद में झुर्रियां आने लगी थीं लेकिन आज वह माता-पिता बन चुके हैं। आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की मदद से उन्हें संतान पैदा हुई। हमेशा शांत रहने वाले घर में किलकारियां गूंजने से खुशियां लौट आईं।



मेडिकल कॉलेज की डॉ. हेमा जे शोभने और डॉ. प्रीति गुप्ता ने संयुक्त रूप से बताया कि बेतरतीब जीवनशैली और अनियमित खानपान से गर्भधारण में परेशानी बढ़ रही हैं। शराब के व्यसन से पुरुष में शुक्राणु और महिलाओं में अंडाणु (डिंब) की संख्या कम हो जाती है या कमजोर हो जाते हैं। यही नहीं, कई तरह के संक्रमण होने से महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब (गर्भाशय नली) बंद हो जाती है। ऐसे हालात में संतान पैदा होने की उम्मीद लगभग समाप्त हो जाती है। डाॅक्टरों ने बताया कि बांझपन का बड़ा कारण ज्यादा उम्र पर विवाह करना है। शुरुआत में महिलाएं अपने कॅरिअर पर ध्यान देती हैं। वहीं, गुटखा खाने के चलन से पुरुषों में बांझपन बढ़ा है। धूम्रपान से भी समस्या बढ़ी है। ऐसे लोगों के लिए आईवीएफ तकनीक उम्मीद लेकर आई है।
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केस-एक

राजगढ़ के 58 वर्षीय व्यक्ति के इकलौते बेटे की असमय मृत्यु हो गई। जिस समय बेटे की मृत्यु हुई, पत्नी की उम्र करीब 49 वर्ष थी। बेटे के चले जाने के बाद दंपती के जीवन में अंधेरा छा गया। अब न संपत्ति का वारिस नजर आ रहा था और न बुढ़ापे का सहारा। ऐसे में दंपती ने आईवीएफ से संतान पैदा करने का फैसला लिया और करीब दो साल पहले बेटी पैदी हुई।

केस-दो



ललितपुर के रहने वाले राजेश की शादी 22 साल पहले संगीता से हुई। शादी के सात-आठ साल तक जब संतान नहीं हुई तो डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने इलाज शुरू कर दिया मगर संतान नहीं हुई। जगह-जगह मन्नतें भी मांगीं मगर मनोकामना पूरी नहीं हुई। तब आईवीएफ से संतान पैदा करने का फैसला लिया। झांसी के एक सेंटर पर दिखाया और 13 जुलाई को लड़की पैदा होने से घर में किलकारी गूंजने लगी।



केस-तीन

शहर की एक प्रतिष्ठित कॉलोनी में रहने वाली नेहा ने बताया कि उनकी शादी को तीन साल गुजर गए। संतान न होने पर डॉक्टर को दिखाया, तब पता चला कि पत्नी की गर्भाशय नली पूरी तरह से बंद है और वह मां नहीं बन सकती है। डॉक्टर के परामर्श पर आईवीएफ का सहारा लिया। वर्तमान में सात माह का गर्भ है।
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केस-चार



गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति बीएचईएल में नौकरी करते हैं। उनकी शादी को सात साल हो गए मगर संतान नहीं हुई। उन्हें पत्नी को दिल्ली ही नहीं गोरखपुर के भी कई डॉक्टरों को दिखाया। फिर भी कोई राहत नहीं मिली। संतान होने की हर उम्मीद खत्म होने के बाद आईवीएफ से संतान पैदा करने का फैसला लिया। महिला ने बताया कि वह नौ माह की गर्भवती हैं।
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