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लघु सिंचाई विभागः टेंडर घोटाले की आंच में तपेंगे अफसर

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झांसी। लघु सिंचाई विभाग में चेकडैम के टेंडरों में हुए घोटाले की जांच शनिवार को जारी रही। विकास भवन के बंद कमरे में सीडीओ व अन्य अधिकारी आठ घंटे तक पड़ताल में जुटे रहे। हर निविदा की गहराई से जांच की जाती रही। जानकारों के अनुसार इस गड़बड़ी में विभागीय अफसरों के लपेटे में आने की भी संभावना है।
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लघु सिंचाई विभाग द्वारा 20 करोड़ से चेकडैम के साथ ही लगभग दस करोड़ रुपये की लागत से 40 तालाबों का गहरीकरण किया जाना है। इसके लिए ऑनलाइन निविदाएं मांगी गईं थीं। 21 नवंबर से निविदाएं डलना शुरू हुईं थीं। 26 नवंबर को चेकडैम की निविदाएं लॉक कर दी गईं थीं। जबकि 27 को तालाब गहरीकरण के कामों की निविदाएं लॉक की जानी थीं।
इससे पहले ही प्रक्रिया पर आरोप लगने लगे। आरोप था कि प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद भी ठेकेदारों के बीच पूल बन गया। शिकायत जिलाधिकारी के पास पहुंची। उन्होंने पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे को दी। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी सामने आने पर शुक्रवार को चेकडैम की निविदाएं निरस्त कर दी गईं थीं। शनिवार को आगे की जांच लगातार जारी रही। विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ठेकेदारों द्वारा डाली गईं निविदाओं की पड़ताल में जुटे रहे। चालीस फीसदी से अधिक जांच कर ली गई है। सोमवार को जांच पूरी हो पाएगी। सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों के बीच टेंडर को लेकर बने पूल में विभागीय लोगों की भी संलिप्तता सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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