झांसी/ओरछा। आज नहीं तो कल हिपहॉप छोड़कर युवा पीढ़ी शास्त्रीय संगीत की ओर लौटेगी। इसके लिए ओरछा जैसी जगह प्रेरणादायी हो सकती है यहां जो भी गायक आता है उसे अपने आप ही गायकी में शास्त्रीयता का अहसास होने लगता है। यह बात फिल्म जगत की जानीमानी गायिका शिल्पा राव ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि पर्यटन नगरी ओरछा में आकर मैं रोमांचित हूं। मैंने सोचा भी नहीं था कि यहां प्राकृतिक रुप से काफ ी समृिद्ध है। नमस्ते ओरछा में प्रस्तुति देने के बाद रात में होटल में ही मैंनेे रियाज किया। यहां मुझे अंदर से गजल और क्लासिकल गाने की फ ीलिंग आ रही थी। देश के ज्यादातर पर्यटक आगरा जयपुर सहित अन्य महानगरों की ओर रुख करते हैं, उन्हें पता ही नहीं है कि ओरछा अपने आप में प्राकृतिक सौंदर्य से भरी रहस्यमयी जगह है। यहां आकर ऐसा लगता है कि जैसे आप पुराने समय में लौट आए हों। मुझे खुद ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं 16वीं सदी में पहुंच गईं हॅू।
हिपहोप की ओर बढ़ती युवा पीढ़ी के सवाल पर शिल्पा ने कहा बचपन में हमें माता.पिता घर का खाना खिलाते हैं, लेकिन जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वैसे-वैसे फ ास्ट फूड और चायनीज की ओर आकर्षित होने लगते हैं। लेकिन, इन सबके बाद एक समय ऐसा आता है जब हमें फि र वही घर का खाना पसंद आने लगता है। ठीक वैसे ही वेस्टर्न संगीत के बाद निश्चित रुप से देश के युवा भी क्लासिकल की ओर लौटेंगे। ओरछा में संगीत को लेकर कोई प्लानिंग के पर शिल्पा ने कहा कि है कि निश्चित रुप से ओरछा में प्राकृतिक रुप से काफ ी सारी जगह हैं। जहां पर संगीत को लेकर कार्य किया जा सकता है। खासकर गजल और शास्त्रीय गायन को लेकर यहां का माहौल काफ ी अनुकूल है। ओरछा को लेकर अन्य म्यूजियिसन के साथ प्लानिंग करेंगे और यहां के बारे में उन्हें बताएंगे। ’ओरछा महानगरों की भीड़भाड़ वाली जिंदगी और ध्वनि प्रदूषण से काफी अलग है। यहां सुबह उठते ही पक्षियों का कलरव मंदिरोें के वेदमंत्रोच्चार, नदी की की कल-कल करती आवाज आपको अंदर से गुनगुनाने के लिए प्रेरित करती है। यहां आते ही मुझे सुकून मिला। यहां का वातारण संगीत के लिए माहौल निर्मित करता है।
शिल्पा राव ने इन हिट फिल्मों में दी है अपनी आवाज
शिल्पा ने यूं तो एक दर्जन से भी अधिक फिल्मों में अपनी आवाज दी है, पर उनकी हिट फिल्मों में धूम-3, हिटकी, ये जवानी दिवानी, बचना ए हसीनो, 3जी, अनवर , लुटेरा, पा और कॉकटेल है।