झांसी। घर-घर ताली बजाकर दूसरों की खुशियों में शरीक होकर दुआएं देने वाले किन्नर भले ही आज भी समाज की मुख्यधारा से कटे हैं लेकिन किसी को दुनियादारी सीखनी हो तो इनसे सीखें। ये गोद लेकर दूसरों की बेटियां पाल रहे हैं, जरूरतमंदों की बेटियों के हाथ पीले कर उनकी डोली सजा रहे हैं। आस-पड़ोस के सुख-दुख में शामिल हो रहे हैं। शहर में अपने लिए एक सुंदर दुनिया का ख्वाब संजोने वाले किन्नरों का कहना है कि उन्हें समाज का तिरस्कार या हमदर्दी नहीं, सिर्फ प्यार और मान-सम्मान चाहिए।
सीपरी बाजार नंदनपुरा रोड पर रहने वाले किन्नरों के गुरु राजू की जितनी तारीफ की जाए वह कम ही लगेगी। वह अपने गुरु नूरी (दिवंगत) द्वारा गोद ली गई चार साल की बच्ची को अपनी बेटी की तरहपालपोश रहे हैं। बच्ची उन्हें मां कहकर बुलाती है। इस परिवार का हिस्सा किन्नर हिना बताती हैं कि बच्ची उन सबको मौसी कहकर बुलाती है। बताया कि अभी गुरु जी किन्नरों के बड़े सम्मेलन में बाहर गए हैं। उनके गुरु बेटियों के शादी-ब्याह और जरूरतमंदों की सेवा में आगे रहते हैं। इनका कहना है कि समाज में उन लोगों के प्रति धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। वह भी समाज से अपने लिए मान-सम्मान चाहते हैं। इनके घर में खाना पकाने वाली महिला बताती हैं कि उनकी बड़ी बेटी की शादी भी गुरु जी ने कराई थी।
उधर, बाहर सैंयर गेट मदकखाना में रहने वाली किन्नर गुरु को मोहल्ले के सभी लोग काकी बुलाते हैं। इनके चेले लाड़ो ने बताया कि गुुरु जी इन दिनों सम्मेलन में बाहर गए हैं। उनके गुरु जैसे कम ही लोग होते हैं। काकी की उम्र 65 वर्ष की है। वह मोहल्ले ही नहीं घर पर आने वाले हर जरूरतमंद को सहारा देती हैं। काकी के घर खाना बनानेे वाली साबरा बताती हैं कि वह पिछले 10 वर्षों से यहां काम कर रही हैं, उनकी पोती खुशी भी साथ रहती है। काकी हमेशा उनका परिवार की तरह सहयोग करती हैं।
गुरु के मान का मतलब भगवान की पूजा, मिलकर मनाते हैं होली-दिवाली और ईद
झांसी। किन्नर हिना और किन्नर सुनीता बताती हैं कि उनके समाज में गुरु का मान-सम्मान भगवान की पूजा के बराबर है। उनके समाज में कोई भी ऐसा नहीं है जो अपने की किसी बात को अनदेखा करे। समाज के सभी फैसले गुरु ही करते हैं, आदर और मान के चलते गुरु पलंग पर सोते हैं जबकि उनके चेले जमीन पर सोते हैं। बुजुर्ग गुरु की सेवा भी चेले ही करते हैं। नवरात्र पर कलश स्थापना कर व्रत रहते हैं, माता का दरबार सजाते हैं और होली-दिवाली व ईद समेत सभी तीज-त्योहार मिलकर मनाते हैं। झांसी में जीवनशाह, नगरा, नौ नंबर और मदकखाना आदि जगह किन्नरों के छह-सात घर हैं। शहर में इस समाज के तकरीबन 30-32 लोग हैं।