उर्द खरीद केंद्रों पर प्रशासन द्वारा सोमवार को गल्ला मंडी में उड़द की जांच के दौरान हंगामा हो गया। एडीएम की जांच के दौरान एक फर्म पर उड़द का स्टॉक व रजिस्टर में अंतर मिला, जिस पर फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई से नाराज व्यापारियों ने मंगलवार से गल्ला मंडी अनिश्चितकाल के बंद करने का निर्णय लिया है और आज जिलाधिकारी को ज्ञापन भी देंगे।
शासन द्वारा किसानों को सही मूल्य दिलाने के लिए उड़द का समर्थन मूल्य तीन गुना किया गया है, लेकिन आए दिन किसानों के साथ ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। इसी वजह से जिला प्रशासन द्वारा लगातार क्रय केंद्रों व मंडी में उड़द के बिना गेट पास या अवैध रूप से उड़द का स्टॉक कर क्रय केंद्रों पर तुलवाने से रोकने के लिए निरीक्षण कर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इसके चलते जिलाधिकारी द्वारा तीन दिन पूर्व मंडी के निरीक्षण में चार-पांच सौ उड़द से भरी बोरियां वाहनों में भरकर मंडी से बाहर जाने की जानकारी मिली थी, जिसकी जांच के लिए अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह और जिला खाद विपणन अधिकारी राकेश त्रिपाठी सोमवार को सुबह साढ़े दस बजे मंडी में अंकुर इंटरप्राइजेज की फर्म पर पहुंचे और रजिस्टर व स्टॉक की जांच की। जहां उड़द का स्टॉक 788.36 क्विंटल दिखाया गया था। मौके पर अंकुर इंटरप्राइजेज के गोदाम एवं गोदाम के सामने रखे उड़द की जांच की गई। जिसमें कुल 1082 बोरे मौजूद पाए गए। प्रत्येक बोरे में 60 किग्रा उड़द भरा हुआ पाया गया। जो स्टॉक पंजिका में अंकित मात्रा से 139.16 क्विंटल कम है। मौके पर मौजूद फर्म के प्रोपराइटर द्वारा उक्त स्टॉक की कमी के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। एडीएम द्वारा उक्त व्यापारी की फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया और मंडी में उड़द की बाहर निकासी पर बिना अनुमति के रोक लगा दी गई और जांच होने तक गेट पास बनाने पर रोक लगा दी। अचानक प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जांच में पाए गए स्टॉक के कम पाए जाने की बात से असंतुष्ट व्यापारियों ने आपत्ति जताई, तो उनके सामने फिर गिनती कराने की मांग की। व्यापारियों ने यहां हंगामा कर दिया। इसके चलते पुलिस प्रशासन बुला लिया गया था। वहीं, हंगामा बढ़ते देख अधिकारी वापस लौट गए, लेकिन व्यापारियों ने मंगलवार से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर हड़ताल की चेतावनी भी दे दी।
निरीक्षण में मंडी सचिव समेत 13 कर्मचारी अनुपस्थित, स्पष्टीकरण मांगा
अपर जिलाधिकारी के निरीक्षण में सोमवार को मंडी सचिव पुष्पेंद्र वर्मा अनुपस्थित पाये गये और बताया गया कि जिला मुख्यालय से बिना किसी सूचना के बाहर गये हैं। इसी दौरान मंडी समिति परिसर में कार्यरत कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका का भी अवलोकन किया गया, जिसमें लेखाकार सत्यप्रकाश जायसवाल, लिपिक देवेंद्र कुमार निरंजन, लिपिक, मंडी सहायकधर्मलाल यादव, मंडी सहायक आनंद कुमार, मंडी अभिरक्षक दिनेश कुमार नांगल, अमित कुमार अनुपस्थित पाए गए। इसके अलावा मंडी सहायक नंदलाल पटेल एवं पंप आपरेटर रमेश कुमार चौरसिया द्वारा उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर किए गए, लेकिन निरीक्षण के समय अपनी डयूटी पर मौजूद नहीं पाए गए। निरीक्षण के समय मंडी समिति परिसर में चपरासी आनंद संज्ञा एवं अमित कुमार चपरासी मौजूद थे। इस प्रकार कार्यरत 15 सदस्यों के स्टाफ में मात्र केवल दो चपरासी स्तर के कर्मचारी ही उपस्थित पाए गए। मंडी सचिव का मुख्यालय से अनुपस्थित रहना इस बात का प्रतीक है कि इनके द्वारा मंडी के कार्यों में कोई रुचि नहीं है।
गेट पास के लिए खड़े रहे उड़द से भरे वाहन
प्रशासन द्वारा बिना अनुमति के उड़द के वाहनों पर रोक लगा दी गई, जिसके चलते देर रात तक व्यापारी उड़द से भरे वाहन लेकर गेट पास के लिए मंडी सचिव के चक्कर काटते रहे। हालांकि रात्रि करीब सवा सात बजे डिप्टी आरएमओ ने मंडी में पहुंचकर उड़द के कागजों की जांच कर गेट पास बनवाना शुरु कर दिया, तब कहीं जाकर व्यापारी कुछ संतुष्ट नजर आए।
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इनका कहना है-
प्रशासन द्वारा मंडी में व्यापारी के माल की पूरी गिनती नहीं की और लाइसेंस निरस्त करना गलत है। अधिकारियों द्वारा जांच के नाम पर व्यापारियों से अभद्रता की है। गल्ला व्यापारी मंगलवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे और मंडी अनिश्चितकाल के लिए बंद रखकर हड़ताल पर रहेंगे।
अशोक अनौरा, अध्यक्ष गल्ला व्यापार संघ।
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इनका कहना है-
मंडी में निरीक्षण के दौरान अंकुर इंटरप्राईजेज फर्म पर स्टॉक व रजिस्टर में अंतर पाया गया, जिस पर फर्म का लाइसेंस निरस्त किया गया है। बिना अनुमति के मंडी से उड़द की निकासी पर भी रोक लगाई गई है।
योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी।